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खालिस्तानियों पर अब सख्ती का संकेत: कनाडा की NSA नाथाली ड्रुइन से मिले अजीत डोभाल, क्या निकला नतीजा?

खालिस्तानियों पर अब सख्ती का संकेत: कनाडा की NSA नाथाली ड्रुइन से मिले अजीत डोभाल, क्या निकला नतीजा?

भारत और कनाडा के बीच तनावपूर्ण रिश्तों में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की कनाडाई समकक्ष नाथाली जी. ड्रुइन के साथ हुई अहम बैठक में खालिस्तानी उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक के बाद दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों में 'नया अध्याय' शुरू करने का ऐलान किया है, लेकिन भारत ने कनाडा से खालिस्तानी तत्वों पर लगाम लगाने और भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। क्या यह बैठक खालिस्तानियों पर एक्शन का संकेत है?

2023 में कनाडाई खालिस्तानी विभाजनवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद भारत-कनाडा संबंधों में गंभीर खटास आ गई थी। दोनों देशों ने राजदूतों को निष्कासित किया, व्यापार वार्ताएं रुक गईं और उच्च स्तरीय संवाद ठप हो गया। लेकिन जून 2025 में जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात के बाद हवा का रुख बदल गया। दोनों नेताओं ने संबंधों को पटरी पर लाने का संकल्प लिया, और हाल ही में दोनों देशों ने नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की। इसी कड़ी में 18 सितंबर को नई दिल्ली में एनएसए स्तर की द्विपक्षीय सुरक्षा परामर्श बैठक हुई।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह बैठक नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा संवाद का हिस्सा थी। कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार (एनएसआईए) नाथाली ड्रुइन 18 सितंबर को भारत पहुंचीं, जहां उन्होंने डोभाल से घंटों चर्चा की। अगले दिन वरिष्ठ अधिकारियों के बीच व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा हुई।

खालिस्तानी मुद्दा

बैठक का सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा खालिस्तानी उग्रवाद। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, भारतीय पक्ष ने कनाडा से भारतीय राजदूतावासों और मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया, खासकर तब जब खालिस्तानी समूहों ने वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई हो। भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोधों पर भी जोर दिया, जो लंबे समय से लंबित हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने खालिस्तानी गतिविधियों से उत्पन्न खतरों को रेखांकित किया, जिसमें भारतीय अधिकारियों को निशाना बनाने की धमकियां शामिल हैं। दूसरी ओर, कनाडा ने भारत से जुड़े ट्रांसनेशनल अपराधी गिरोहों के बारे में अपनी चिंताएं साझा कीं। हालांकि, एमईए ने खालिस्तान का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन स्रोतों का कहना है कि यह मुद्दा बैठक का केंद्रबिंदु रहा।

एमईए के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, "जब भी कोई चिंता होती है, हम संबंधित पक्ष से इसे उठाते हैं, यहां कनाडा से, ताकि हमारी संपत्तियों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित हो।" यह बयान खालिस्तानी खतरे के संदर्भ में दिया गया।

सुरक्षा सहयोग से आगे बढ़ने की राह

बैठक केवल खालिस्तान तक सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों ने आतंकवाद-रोधी, ट्रांसनेशनल संगठित अपराध, खुफिया आदान-प्रदान और क्षेत्रीय-वैश्विक विकास पर विस्तृत चर्चा की। एमईए प्रेस रिलीज के अनुसार, दोनों ने विश्वास बहाली और उच्च राजनीतिक स्तर पर सहयोग विस्तार की गति को स्वीकार किया। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भविष्य के सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ।

19 सितंबर को हुई वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, नागरिक परमाणु सहयोग, सुरक्षा, कानून प्रवर्तन, महत्वपूर्ण खनिज, अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कृषि जैसे क्षेत्रों में संवाद तंत्र को पुनर्जीवित करने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई। मिशनों और वाणिज्य दूतावासों में क्षमता संबंधी मुद्दों को हल करने का भी फैसला हुआ, ताकि जन-से-जन संपर्क मजबूत हो और आर्थिक अवसर बढ़ें।

नतीजा: 'नया अध्याय' की शुरुआत

बैठक के बाद दोनों पक्षों ने संबंधों में स्थिरता बहाल करने और 'रचनात्मक एवं संतुलित' साझेदारी की दिशा में काम करने का संकल्प लिया। डेक्कन हेराल्ड के अनुसार, डोभाल और ड्रुइन ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और मौजूदा संवाद तंत्रों को सशक्त बनाने पर सहमति जताई। यह कनाडा के नए एनएसआईए के रूप में ड्रुइन की पहली भारत यात्रा थी, जो संबंधों में सकारात्मक बदलाव का संकेत देती है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट में कहा गया कि यह बैठक भारत-कनाडा संबंधों को रीसेट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, खालिस्तानी मुद्दे पर ठोस कार्रवाई न होने तक भारत की सतर्कता बरकरार रहेगी। क्या कनाडा अब खालिस्तानियों पर एक्शन लेगा? आने वाले दिनों में इसका जवाब मिलेगा।

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