न्यूज प्लस डेस्क, नई दिल्ली। मनरेगा से बापू का नाम हटाकर ‘जी राम जी’ कर दिया गया और 10 की जगह राज्यों पर 40 फीसदी बोझ डाल दिया। सवाल यह है कि यह बापू का अपमान है या राज्यों पर बोझ बढ़ाकर योजना पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया गया है। विपक्ष दोनों ही सवाल उठा रही है।
केंद्र सरकार मनरेगा को बदलने जा रही है। नई योजना में मजदूरी वही रहेगी लेकिन मजदूरों को 100 की 125 दिन के रोजगार का प्राविधान है। मजदूरों को खेती के पीक समय पर मनरेगा में काम नहीं मिलेगा, लेकिन योजना में अब गांधी जी का नाम नहीं रहेगा। सबसे बड़ा परिवर्तन यह किया जा रहा है कि अभी तक केंद्र सरकार योजना में 90 फीसदी पैसा देती थी और प्रदेश सरकारों को 10 फीसदी ही देना पड़ता था। अब मैदानी राज्यों में केंद्र सरकार योजना के लिए सिर्फ 60 फीसदी देगी और प्रदेश सरकारों को 40 फीसदी पैसा देना होगा। पहाड़ी राज्यों में जरूर 90 और 10 फीसदी का नियम लागू रहेगा।
अभी तक प्रदेश सरकारों को 10 फीसदी देना ही मुश्किल होता था अब वह 40 फीसदी कहां से देंगी। अभी भी मजदूरों को कई-कई माह में भुगतान हो पा रहा था अब जब 40 फीसदी देना होगा तो मजदूरी कहां से मिल पाएगी। जाहिर है योजना फंसना तय है और योजना में मजदूरों को वास्तव में 125 दिन काम मिल पाएगा संभावना कम है। अभी जब मनरेगा में 100 दिन की गारंटी दी जा रही थी तब 50 दिन काम देना मुश्किल होता था अब जब प्रदेशों पर बोझ बढ़ेगा तो 50 दिन भी काम मिल पाएगा इस पर संशय है।



