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Asian Para Games 2026: सचिन खिलारी का गोल्ड, शॉट पुट में भारत का क्लीन स्वीप

Asian Para Games 2026: सचिन खिलारी का गोल्ड, शॉट पुट में भारत का क्लीन स्वीप

सचिन खिलारी ने रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ जीता गोल्ड

पुरुषों के शॉट पुट F46 इवेंट में सचिन सरजेराव खिलारी ने अपने शानदार प्रदर्शन से स्वर्ण पदक हासिल किया। उन्होंने अपने छठे और अंतिम प्रयास में 15.87 मीटर दूर गोला फेंककर गोल्ड मेडल पक्का किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने प्रतियोगिता का पिछला रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया, जो 15.67 मीटर था।

सचिन के लिए यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि उन्होंने पिछले एशियाई पैरा खेलों में जीते अपने स्वर्ण पदक का सफलतापूर्वक बचाव किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है, लेकिन सचिन ने दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन करके अपनी क्षमता साबित की।

उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बधाई दी। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में सचिन की निरंतरता, दृढ़ संकल्प और खेल में उत्कृष्टता की सराहना की गई।

शॉट पुट F46 में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा

इस मुकाबले में भारत की सफलता केवल गोल्ड मेडल तक सीमित नहीं रही। मोहम्मद यासर ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि परवीन ने 14.94 मीटर दूर गोला फेंककर ब्रॉन्ज मेडल जीता।

इस तरह पोडियम पर तीनों स्थान भारतीय खिलाड़ियों के नाम रहे। किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में एक ही देश के खिलाड़ियों का गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों पदक जीतना बेहद खास उपलब्धि मानी जाती है। इससे भारतीय पैरा-एथलेटिक्स की मजबूती और खिलाड़ियों की तैयारी का भी पता चलता है।

F46 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिन्हें हाथ या ऊपरी अंग से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता होती है। इस वर्ग में खिलाड़ी खड़े होकर थ्रो करते हैं। तकनीक, संतुलन, ताकत और सही समय पर ऊर्जा लगाने की क्षमता प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाती है।

सिमरन और प्रवीण कुमार ने भी जीते गोल्ड

भारत के लिए प्रतियोगिता के तीसरे दिन अन्य खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। धाविका सिमरन शर्मा ने महिलाओं की 100 मीटर T12 स्पर्धा में 12.02 सेकंड का समय निकालकर गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इससे पहले वह 200 मीटर T12 स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं।

ऊंची कूद में प्रवीण कुमार ने पुरुषों की T44/64 स्पर्धा में 2.05 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड अपने नाम किया। उन्होंने भी प्रतियोगिता का रिकॉर्ड बनाया और अपने खिताब का बचाव किया।

वहीं, दिलीप गावित ने पुरुषों की 100 मीटर T46/47 संयुक्त स्पर्धा में 10.69 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसी रेस में भारत के मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकाथी ने 10.72 सेकंड के गेम्स रिकॉर्ड समय के साथ सिल्वर मेडल हासिल किया।

इन नतीजों ने भारतीय एथलेटिक्स अभियान को मजबूती दी और यह दिखाया कि भारत ट्रैक तथा फील्ड दोनों स्पर्धाओं में लगातार पदक जीत रहा है।

तीरंदाजी और तैराकी में भी भारत को सफलता

एथलेटिक्स के अलावा भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरे खेलों में भी पदक हासिल किए। पैरा-तीरंदाजी में शीतल देवी और पायल नाग की जोड़ी ने महिलाओं की कंपाउंड डबल्स स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। फाइनल में उन्हें चीन की जोड़ी से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक भारत के लिए अहम उपलब्धि रहा।

तैराकी में दृष्टिबाधित भारतीय खिलाड़ी रवि कार्तिक बुडिगिना ने पुरुषों की 100 मीटर बैकस्ट्रोक S13 स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। हिमांशु नंदल ने पुरुषों की 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक S11 स्पर्धा में ब्रॉन्ज जीतकर देश की पदक तालिका में योगदान दिया।

इन परिणामों से साफ है कि भारतीय दल की सफलता किसी एक खेल तक सीमित नहीं है। अलग-अलग स्पर्धाओं में खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुसार मुकाबला कर रहे हैं और लगातार पदक जीत रहे हैं।

भारत की पदक तालिका 62 तक पहुंची

21 अक्टूबर को जारी रिपोर्टों के मुताबिक, एशियन पैरा गेम्स में भारत ने कुल 62 पदक हासिल कर लिए थे। इनमें 14 गोल्ड, 22 सिल्वर और 26 ब्रॉन्ज मेडल शामिल थे। इस प्रदर्शन के बाद भारत पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गया था।

एथलेटिक्स भारतीय अभियान के सबसे मजबूत क्षेत्रों में से एक रहा। खिलाड़ियों ने दौड़, ऊंची कूद, शॉट पुट और अन्य फील्ड इवेंट्स में पदक जीतकर टीम की स्थिति मजबूत की। इसके साथ ही तीरंदाजी, तैराकी और अन्य खेलों से मिले पदकों ने भारत की कुल संख्या बढ़ाने में भूमिका निभाई।

पदक तालिका प्रतियोगिता के दौरान लगातार बदलती रहती है, क्योंकि हर दिन नए मुकाबले और फाइनल आयोजित होते हैं। इसलिए भारत की रैंकिंग और कुल पदक संख्या में आगे भी बदलाव संभव है।

भारतीय पैरा-एथलीट्स की मेहनत ने बढ़ाया देश का मान

Asian Para Games में खिलाड़ियों की उपलब्धियां केवल पदकों तक सीमित नहीं हैं। इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले एथलीट्स लंबे समय तक प्रशिक्षण, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचते हैं। सचिन खिलारी का रिकॉर्ड प्रदर्शन और शॉट पुट में भारत का क्लीन स्वीप इसी मेहनत का उदाहरण है।

सिमरन शर्मा, प्रवीण कुमार और दिलीप गावित जैसे खिलाड़ियों की सफलता भी भारतीय पैरा-स्पोर्ट्स के बढ़ते स्तर को दिखाती है। इन उपलब्धियों से नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिल सकती है और देश में पैरा-स्पोर्ट्स के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है।

फिलहाल भारतीय दल की नजर आने वाली स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन करने और पदक संख्या बढ़ाने पर रहेगी। सचिन खिलारी के गोल्ड और शॉट पुट F46 में भारत के तीनों पदक जीतने की उपलब्धि ने प्रतियोगिता में देश के अभियान को यादगार बना दिया है।

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