भारत-घाना के बीच दो बड़े MoU, विज्ञान, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सहयोग होगा मजबूत
भारत और घाना के बीच दो अहम समझौते
भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान दोनों देशों ने विज्ञान, शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, क्षमता निर्माण और कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो समझौता ज्ञापनों यानी MoU का आदान-प्रदान किया।
इन समझौतों को भारत और घाना के बीच बढ़ती व्यापक साझेदारी और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समझौतों के आदान-प्रदान के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुडजेटो अब्लाक्वाह मौजूद रहे।
वैज्ञानिक अनुसंधान और शिक्षा में बढ़ेगा सहयोग
पहला MoU भारत के जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) और यूनिवर्सिटी ऑफ घाना के बीच हुआ है। इसके तहत अकादमिक सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में दोनों संस्थानों के बीच साझेदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।
इस समझौते से दोनों देशों के शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। वैज्ञानिक अनुसंधान और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव और विशेषज्ञता साझा करने से दोनों देशों को अपने संस्थागत क्षमता निर्माण में मदद मिल सकती है।
भारत की वैज्ञानिक संस्थाओं और घाना के शैक्षणिक संस्थानों के बीच इस तरह का सहयोग विशेष रूप से अनुसंधान, प्रशिक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा पर भी समझौता
दूसरा MoU भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR और घाना के CSIR-Crops Research Institute के बीच हुआ है। यह समझौता कृषि अनुसंधान और शिक्षा में सहयोग से जुड़ा है।
कृषि दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भारत और घाना के बीच सहयोग से नई तकनीकों, शोध और बेहतर कृषि पद्धतियों को साझा करने का रास्ता खुल सकता है।
दोनों संस्थानों के बीच सहयोग का उद्देश्य कृषि क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान और शिक्षा को बढ़ावा देना है। इससे कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के बीच ज्ञान एवं अनुभव साझा करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
व्यापार से रक्षा और तकनीक तक बातचीत
MoU के अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री सैम ओकुडजेटो अब्लाक्वाह के बीच भारत-घाना व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने को लेकर विस्तृत बातचीत हुई।
दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, विकास सहयोग, फार्मास्यूटिकल्स, क्षमता निर्माण, रक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा। दोनों देशों ने बहुपक्षीय सहयोग और अफ्रीकी संघ यानी African Union तथा ECOWAS के साथ भारत की भागीदारी को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने घाना के राष्ट्रपति से भी की मुलाकात
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपनी घाना यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जॉन द्रम्मानी महामा से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और घाना के बीच संबंधों की मौजूदा गति और भविष्य में व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने के मुद्दे पर बातचीत की।
जयशंकर ने राष्ट्रपति महामा को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं भी दीं। बातचीत में भारत और घाना के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अफ्रीकी संघ और ECOWAS पर भारत की नजर
भारत और घाना के बीच बातचीत में अफ्रीकी संघ और ECOWAS के साथ सहयोग भी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। घाना ECOWAS का संस्थापक सदस्य है और पश्चिम अफ्रीका में इस संगठन की महत्वपूर्ण भूमिका है।
भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपने संबंधों को केवल व्यापार और निवेश तक सीमित रखने के बजाय शिक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, रक्षा, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार देना चाहता है।
घाना के साथ बातचीत इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। दोनों देशों ने ग्लोबल साउथ के साझेदारों के रूप में साझा विकास लक्ष्यों और ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया है।
भारत-घाना संबंधों में नई दिशा
भारत और घाना के बीच संबंधों को पिछले कुछ समय में नई गति मिली है। दोनों देश व्यापार, विकास सहयोग और तकनीक समेत कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
घाना की ओर से भी भारत के साथ संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर पर मजबूत करने की इच्छा दिखाई गई है। ऐसे में विज्ञान और कृषि अनुसंधान से जुड़े नए MoU दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग को और मजबूत कर सकते हैं।
विशेष रूप से कृषि और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आम जनता और विकास से जुड़े मुद्दों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं। इनके जरिए शोध संस्थानों और विशेषज्ञों के बीच संपर्क बढ़ने की संभावना है।
जयशंकर की तीन देशों की यात्रा
एस. जयशंकर की मौजूदा अफ्रीका यात्रा केवल घाना तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्री 6 से 10 अक्टूबर तक घाना, कोट द'ईवोआर और इथियोपिया की तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
घाना इस यात्रा का पहला पड़ाव है। इसके बाद जयशंकर दोनों अन्य देशों के नेतृत्व और अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
इस यात्रा के जरिए भारत अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। सबसे पहले टिप्पणी करें!