बांकीपुर में बड़ा उलटफेर-पीके ने किया खेला, दतिया में भी चूकी भाजपा
नई दिल्ली, न्यूज प्लस। बांकीपुर में जन सुराज संस्थापक प्रशांत किशोर ने बड़ा उलटफेर कर दिया है, यह केवल बड़ा उलटफेर नहीं बल्कि इसने भाजपा के रणनीतिकारों को चिंता में डाल दिया है। प्रशांतकिशोर ने बीजेपी की जमीन हिला दी है। यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की सीट थी जो 30 सालों से उनके और उनके पिता यानी भाजपा के पास थी। नितिन नबीन ने पिछले चुनाव में यह सीट 51 हजार वोटों से जीती थी। यह नितिन नबीन, सीएम सम्राट चौधरी के साथ पूरे एनडीए को बड़ा झटका है। मप्र की दतिया सीट भी भाजपा के हाथ से निकल गई, कांग्रेस ने यहां भाजपा के रणनीतिकारों को सोचने पर मजबूर मजबूर कर दिया है, यह कभी भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा की सीट होती थी।
बांकीपुर की हार नितिन नबीन को झटका है या बिहार के सीएम सम्राट चौधरी को। प्रशांत किशोर विधानसभा में सम्राट चौधरी के खिलाफ सबसे मुखर नेता होंगे। यह सीट 1995 से नितिन नबीन के पिता नबीन सिन्हा के पास थी, उनकी मृत्यु के बाद भाजपा ने उनके बेटे नितिन नबीन को चुनाव लड़ाया और तब से लगातार वह जीतते आ रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा ने उनको राज्यसभा भेजा, बांकीपुर सीट उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई। भाजपा को गलफहमी थी कि वह यहां से किसी को भी मैदान में उतारेगी सीट जीत लेगी, लेकिन अब पार्टी को दस बार सोचना होगा।
जेन-जी की नाराजगी बिहार में भी दिख रही थी, युवा बांकीपुर में भी पीके के साथ दिख रहा था। दूसरा सम्राट चौधरी से नाराजगी भी इस सीट पर दिखी। अगड़ी जाति के लोगों को प्रशांत किशोर के रूप में विकल्प मिल गया और वह उधर चला गया। सम्राट चौधरी को भी गंभीरता से सोचना होगा, उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला चुनाव था। उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं वह भी भाजपा को पीछे ले गईं। प्रशांत किशोर लगातार सम्राट चौधरी को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं, अब विधानसभा के अंदर सम्राट चौधरी उनके लिए नई चुनौती बनेंगे। तेजस्वी यादव के लिए वह बड़ी चुनौती बनने वाले हैं। प्रशांतकिशोर के निशाने पर सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव दोनों रहेंगे। जीत के बाद प्रशांत किशोर पहले ही बयान में सम्राट चौधरी पर निशाना साधा तो आरजेडी नेता मीसा भारती ने प्रशांत किशोर को भाजपा की लोमड़ी बताया।
मप्र की दतिया सीट पर भी भाजपा को मात मिली है, यह सीट भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा की थी। उनका टिकट काटकर भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की थी कि पार्टी से बड़ा कोई नेता नहीं है। उनका टिकट कटने पर समर्थकों ने काफी हंगामा किया था, जिलाध्यक्ष ने उनके समर्थन में इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद भी भाजपा रणनीतिकारों ने प्रत्याशी बदलकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा। भाजपा के अंदर का गुस्सा चुनाव में देखने को मिला जिसका नतीजा यह हुआ के कांग्रेस ने दांव मार लिया। कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने यहां से अच्छी जीत हासिल की। गुजरात की मांजलपुर सीट भाजपा की पारंपरिक सीट है और यहां वही परंपरा वोटरों ने निभायी। भाजपा के सतीश पटेल ने यहां से अच्छी जीत हासिल की।
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