दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने पर GRAP-I लागू, मेट्रो चलाएगी 20 अतिरिक्त फेरे
दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ ही प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने कदम तेज कर दिए हैं। राजधानी दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण को लागू कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित करने के लिए 22 अक्टूबर से सप्ताह के कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप चलाने का फैसला किया है।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए मेट्रो के निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों पर धूल कम करने के उपाय भी तेज किए जाएंगे। अधिकारियों की निगरानी बढ़ाने के साथ निर्माण सामग्री को ढककर रखने, सड़कों की सफाई और पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंची
दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ने के बाद GRAP-I लागू करने का निर्णय लिया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के आधार पर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे दिल्ली का दैनिक औसत AQI 244 दर्ज किया गया। शाम 4 बजे यह बढ़कर 245 तक पहुंच गया। इससे पहले 20 अक्टूबर को AQI 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है।
एक दिन के भीतर वायु गुणवत्ता में आए इस बदलाव के बाद CAQM की संबंधित उपसमिति ने स्थिति की समीक्षा की। मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए दिल्ली-NCR में GRAP के पहले चरण की सभी निर्धारित कार्रवाइयां तत्काल प्रभाव से लागू करने का फैसला किया गया।
AQI का स्तर 201 से 300 के बीच होने पर हवा को खराब श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे हालात में प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण के लिए संबंधित एजेंसियों को सक्रिय किया जाता है, ताकि स्थिति और गंभीर होने से रोकी जा सके।
22 अक्टूबर से मेट्रो की 20 अतिरिक्त ट्रिप
दिल्ली मेट्रो ने प्रदूषण कम करने की कोशिशों के तहत यात्रियों को राहत देने और निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने के लिए अतिरिक्त सेवाएं शुरू करने की घोषणा की है। 22 अक्टूबर से सोमवार से शुक्रवार तक मेट्रो नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप संचालित की जाएंगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को निजी कारों और अन्य वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है। सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम होने से यातायात के दबाव और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को घटाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अतिरिक्त ट्रिप शुरू करना प्रदूषण की समस्या का अकेला समाधान नहीं है। हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए परिवहन, निर्माण गतिविधियों, सड़क की धूल और कचरा प्रबंधन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ काम करना जरूरी है। मेट्रो की बढ़ी हुई सेवाएं इसी व्यापक प्रयास का एक हिस्सा हैं।
निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के लिए बढ़ेंगी कार्रवाई
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन अपने निर्माण स्थलों और आसपास के इलाकों में धूल को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाएगा। इसके तहत निर्माण क्षेत्रों में जमा धूल कम करने, आसपास की सड़कों की सफाई करने और फुटपाथों तथा सड़क के बीच बने डिवाइडरों के पास जमा कचरा हटाने पर ध्यान दिया जाएगा।
निर्माण स्थलों से निकलने वाले वाहनों के लिए व्हील-वॉश सुविधाओं की जांच भी की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहनों के पहियों के साथ मिट्टी और धूल सड़क पर न फैले। इसके अलावा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को ठीक से ढककर रखने की व्यवस्था की जांच की जाएगी, ताकि हवा के साथ धूल आसपास के इलाकों में न पहुंचे।
DMRC के इंजीनियर निर्माण स्थलों और उनसे जुड़ी सड़कों का निरीक्षण करेंगे। इन निरीक्षणों के दौरान पर्यावरणीय नियमों के पालन और प्रदूषण रोकने के लिए मौजूद व्यवस्थाओं की स्थिति देखी जाएगी।
250 से अधिक एंटी-स्मॉग और मिस्ट गन लगाई गईं
DMRC के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण के लिए उसके निर्माण स्थलों, मेट्रो स्टेशनों और कार्यालय भवनों पर 250 से अधिक एंटी-स्मॉग और मिस्ट गन लगाई गई हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल धूल के कणों को नियंत्रित करने में मदद के लिए किया जाता है।
मेट्रो निर्माण से जुड़े कामों के कारण लगभग 31 किलोमीटर सड़कें अस्थायी रूप से DMRC के अधिकार क्षेत्र में हैं। निगम का कहना है कि इन सड़कों के बड़े हिस्से की मरम्मत पहले ही कराई जा चुकी है, ताकि सड़क की खराब सतह से अतिरिक्त धूल न उठे।
इसके साथ ही DMRC का पर्यावरण विभाग रोजाना निरीक्षण करता है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले से चल रही इन गतिविधियों को GRAP-I लागू होने के बाद और तेज किया जाएगा। हालांकि, इन उपायों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सभी संबंधित एजेंसियां कितनी प्रभावी ढंग से नियमों का पालन कराती हैं।
GRAP-I के तहत किन बातों पर रहेगा जोर?
ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाने वाले उपायों की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता और पूर्वानुमान के अनुसार प्रदूषण के स्रोतों पर कार्रवाई करना है। पहले चरण में सड़क और निर्माण से उठने वाली धूल, खुले में कचरा जलाने और अन्य स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर नियंत्रण जैसे कदम शामिल हैं।
GRAP-I लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि दिल्ली-NCR में सभी सामान्य गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। इस चरण में निर्धारित नियमों को लागू करने, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की निगरानी करने और लोगों को सावधानी बरतने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर रहता है। स्कूलों और कार्यालयों के सामान्य संचालन पर पहले चरण के तहत अपने आप व्यापक रोक नहीं लगती।
यदि हवा की गुणवत्ता और बिगड़ती है, तो आगे के चरणों के तहत अधिक सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। GRAP के दूसरे चरण का संबंध बहुत खराब श्रेणी की हवा से, जबकि तीसरे और चौथे चरण का संबंध गंभीर और उससे अधिक गंभीर प्रदूषण स्तरों से है। आगे की कार्रवाई प्रदूषण के स्तर और संबंधित पूर्वानुमानों की समीक्षा के आधार पर तय की जाती है।
प्रदूषण से निपटने में नागरिकों की भूमिका भी अहम
प्रशासनिक कदमों के साथ आम लोगों का सहयोग भी प्रदूषण कम करने के प्रयासों में महत्वपूर्ण है। छोटी दूरी के लिए पैदल चलना, साइकिल का इस्तेमाल करना या संभव होने पर मेट्रो और बस जैसे सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देना निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने में मदद कर सकता है।
नागरिकों को खुले में कचरा या अन्य सामग्री जलाने से बचना चाहिए। निर्माण कार्य के दौरान धूल फैलने से रोकने के उपायों का पालन करना और प्रदूषण संबंधी नियमों की अनदेखी होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देना भी उपयोगी हो सकता है।
फिलहाल दिल्ली-NCR में GRAP-I लागू होने के बाद संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करें और हवा की गुणवत्ता पर लगातार नजर रखें। दिल्ली मेट्रो की 20 अतिरिक्त ट्रिप और धूल नियंत्रण अभियान तत्काल उठाए गए कदमों में शामिल हैं। अब इन प्रयासों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और आने वाले दिनों में AQI का स्तर किस दिशा में जाता है।
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