बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच NDA ने अपनी सीट शेयरिंग को अंतिम रूप दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के प्रमुख दलों भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU)) के बीच सीटों का बंटवारा लगभग बराबरी पर हुआ है, जबकि छोटे सहयोगी दलों को भी उनकी ताकत और रणनीतिक महत्व के आधार पर सीटें आवंटित की गई हैं। यह निर्णय बिहार की 243 विधानसभा सीटों के लिए लिया गया है, और इसका औपचारिक ऐलान जल्द ही होने की संभावना है।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, NDA के प्रमुख दल BJP और JD(U) दोनों 100-105 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि JD(U) को 102-103 सीटें मिल सकती हैं, जबकि BJP को 101-102 सीटें दी जा सकती हैं, जिससे JD(U) को गठबंधन में "बड़े भाई" की भूमिका दी जा सके। यह व्यवस्था 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनाए गए फॉर्मूले पर आधारित है, जिसमें BJP ने 17, JD(U) ने 16 और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (LJP-RV) ने 5 सीटों पर चुनाव लड़ा था।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जिसका नेतृत्व चिराग पासवान कर रहे हैं, उन्होने शुरू में 40 सीटों की मांग की थी। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, उन्हें 20-28 सीटें मिलने की संभावना है। इसके अलावा, छोटे सहयोगी दलों जैसे जितन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेकुलर) (HAM-S) को 6-7 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 4-5 सीटें मिल सकती हैं।
सीट बंटवारे में चुनौतियां
सीट बंटवारे की प्रक्रिया में कई चुनौतियां सामने आईं। खास तौर पर चिराग पासवान की LJP-RV ने अपनी 2024 लोकसभा चुनाव में सभी 5 सीटों पर जीत और 6% से अधिक वोट शेयर के आधार पर ज्यादा सीटों की मांग की थी। हालांकि, JD(U) और BJP का मानना है कि विधानसभा चुनाव में स्थानीय ताकत और जमीनी उपस्थिति ज्यादा मायने रखती है, जिसके कारण LJP की मांग को 20-28 सीटों तक सीमित किया गया।
इसके अलावा, मुकेश साहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP), जो वर्तमान में विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा है, के NDA में शामिल होने की अटकलें भी चर्चा में हैं। यदि VIP गठबंधन में शामिल होती है, तो सीट बंटवारे का समीकरण बदल सकता है।
आपको बता दें 2020 के विधानसभा चुनाव में JD(U) ने 115 सीटों पर और BJP ने 110 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय LJP ने NDA से अलग होकर 135 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसके कारण JD(U) को 27 सीटों पर नुकसान हुआ और वह केवल 43 सीटें जीत पाई, जबकि BJP ने 74 सीटें हासिल कीं। इस बार, LJP के NDA के साथ होने और JD(U) के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की रणनीति के कारण JD(U) ने कम से कम 100 सीटों की मांग की थी, जिसे गठबंधन ने स्वीकार कर लिया है।
NDA ने इस बार चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ने का फैसला किया है, और अभियान का मुख्य लक्ष्य उन्हें फिर से मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करना है। एक वरिष्ठ NDA नेता ने कहा, "JD(U) बिहार में करीब 10% वोटों, खासकर अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के बीच मजबूत पकड़ रखता है। इसलिए, उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।" BJP ने भी अपनी रणनीति में आंतरिक सर्वेक्षणों का सहारा लिया है, ताकि प्रत्येक सीट पर सबसे मजबूत उम्मीदवार उतारा जा सके।
विपक्ष की स्थिति
विपक्षी महागठबंधन, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, और वाम दल शामिल हैं, वो भी अपनी सीट शेयरिंग पर काम कर रहा है। RJD ने 2020 में 75 सीटें जीती थीं और इस बार भी वह सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की कोशिश में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD के तेजस्वी यादव की 'वोटर अधिकार यात्रा' ने विपक्षी गठबंधन को नई गति दी है, जिससे मुकाबला कांटे का होने की उम्मीद है।



