उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव भले अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन राजनीतिक तैयारियां तेज हो गई हैं। एनडीए गठबंधन के भीतर अब सीट बंटवारे को लेकर चर्चा खुलकर सामने आने लगी है। बीजेपी के सहयोगी दल चाहते हैं कि चुनाव से काफी पहले सीटों का फार्मूला तय कर लिया जाए ताकि सभी दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम शुरू कर सकें। इसी सिलसिले में सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर अपनी बात रखी है।
राजभर और निषाद ने रखी अपनी मांग
दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। वहीं संजय निषाद और राजभर दोनों ने बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल से भी बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक दोनों नेताओं ने विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर जल्द चर्चा शुरू करने की मांग रखी। सहयोगी दलों का मानना है कि समय रहते सीटों का फैसला होने से चुनावी तैयारियां ज्यादा प्रभावी तरीके से की जा सकेंगी।
बीजेपी नेतृत्व ने दिया आश्वासन
जानकारी के अनुसार बीजेपी नेतृत्व ने सहयोगी दलों को भरोसा दिलाया है कि सीट बंटवारे को लेकर जल्द बैठक बुलाई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि 21 जून के बाद इस मुद्दे पर औपचारिक चर्चा शुरू हो सकती है। फिलहाल बीजेपी का ध्यान केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने पर चल रहे कार्यक्रमों पर है। यही वजह है कि राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों का अगला चरण जून के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
सीट शेयरिंग पर खुलकर नहीं बोले निषाद
बैठक के बाद संजय निषाद ने सीट बंटवारे के सवाल पर सीधा जवाब देने से बचने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं से मुलाकात और बातचीत समय-समय पर होती रहती है और हर बैठक को राजनीतिक नजरिए से देखना सही नहीं होगा। हालांकि राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि सहयोगी दल अब अपनी हिस्सेदारी को लेकर गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं और समय रहते अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं।
2027 चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक गतिविधियां
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जून के आखिरी सप्ताह से उत्तर प्रदेश में चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी। बीजेपी संगठन को मजबूत करने के लिए बड़े नेताओं के दौरे भी प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ नेता उत्तर प्रदेश का दौरा कर सकते हैं। ऐसे में सीट बंटवारे और गठबंधन की रणनीति दोनों पर तेजी से काम होने की संभावना है।
सहयोगी दलों की भूमिका होगी अहम
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सहयोगी दलों की भूमिका कई सीटों पर निर्णायक मानी जाती है। सुभासपा और निषाद पार्टी पहले भी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी हैं। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले इन दलों की सीटों को लेकर होने वाली बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल संकेत यही हैं कि एनडीए के भीतर सीट बंटवारे की चर्चा अब तेज होने वाली है और आने वाले दिनों में इस पर कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं।
