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बिहार में बदलते समीकरणों के बीच NDA का ऐलान — 30 अक्टूबर को खुलेंगे वादों के पन्ने!

बिहार में बदलते समीकरणों के बीच NDA का ऐलान — 30 अक्टूबर को खुलेंगे वादों के पन्ने!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी के बीच सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी चुनावी रणनीति को और मजबूत करते हुए घोषणा की है कि उसका संयुक्त घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) 30 अक्टूबर को पटना में जारी किया जाएगा।

पटना के एक प्रमुख होटल में आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री समरीत सिंह, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान समेत गठबंधन के अन्य प्रमुख चेहरे मौजूद रहेंगे। यह आयोजन न केवल एनडीए की एकजुटता का प्रतीक होगा, बल्कि विपक्षी महागठबंधन के हालिया घोषणापत्र के जवाब में एक रणनीतिक कदम भी साबित होगा।

एनडीए के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि घोषणापत्र जारी करने का यह फैसला दिल्ली में कल हुई गठबंधन नेताओं की बैठक में लिया गया। "हमारा घोषणापत्र बिहार को 'नंबर वन' राज्य बनाने का ब्लूप्रिंट होगा। इसमें रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे का विकास, कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं-युवाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जाएगा। विपक्ष की तरह हम खोखले वादे नहीं करेंगे, बल्कि पिछले 20 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित ठोस योजनाएं पेश करेंगे।" उन्होंने कहा। प्रेस कॉन्फ्रेंस दोपहर 3 बजे शुरू होगी, जिसमें घोषणापत्र का विमोचन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों किया जाएगा। इसके बाद प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा होगी।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को 43 सीटों पर होगा, जबकि दूसरे चरण में 20 नवंबर को 89 सीटों पर वोटिंग होगी। तीसरा चरण 27 नवंबर को 111 सीटों पर निर्धारित है, और नतीजे 4 दिसंबर को आएंगे। एनडीए, जो वर्तमान में सत्ता में है, पिछले चुनावों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने में सफल रहा है। 2020 के चुनाव में एनडीए ने 125 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जिसमें जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को 43, भाजपा को 74 और अन्य सहयोगियों को शेष सीटें मिली थीं। इस बार भी गठबंधन की एकजुटता पर कोई सवाल नहीं उठा रहा। चिराग पासवान की एलजेपी (रा.वि.) ने हाल ही में कहा था, "एनडीए बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। हमारा फोकस ग्रामीण विकास और शहरीकरण पर होगा।"

एनडीए के घोषणापत्र की प्रतीक्षा विपक्षी दलों में भी बेचैनी पैदा कर रही है। महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) ने कल ही पटना में अपना 'प्राण पत्र' जारी किया, जिसमें प्रत्येक परिवार को एक सरकारी नौकरी की गारंटी, अत्यंत पिछड़ों के लिए एससी-एसटी एक्ट जैसा कानून और आरक्षण बहाली जैसे वादे शामिल थे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने कहा था, "एनडीए का घोषणापत्र आना बाकी है, लेकिन बिहार की जनता पहले ही उनके वादों से तंग आ चुकी है।" ऐसे में एनडीए का यह कदम विपक्ष को काउंटर करने का प्रयास लगता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए का घोषणापत्र कृषि सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और डिजिटल बिहार पर केंद्रित होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, गठबंधन पिछले कार्यकाल में लॉन्च की गई 'सात निश्चय' योजनाओं को आगे बढ़ाने का वादा कर सकता है, जिसमें सौर ऊर्जा, स्कूलों का सौंदर्यीकरण और महिलाओं को साइकिल वितरण शामिल हैं।

पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह बिहार की राजधानी होने के नाते पूरे राज्य की नजरों में रहेगी। एनडीए ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए पूरे बिहार तक पहुंचाने का फैसला किया है, ताकि ग्रामीण मतदाताओं तक संदेश पहुंच सके। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने सोमवार को कहा, "हमारा घोषणापत्र बिहार की 13 करोड़ जनता के सपनों को साकार करने वाला दस्तावेज होगा। विपक्ष के वादे हवा-हवाई हैं, जबकि हमारी योजनाएं जमीन पर उतर चुकी हैं।" जेडीयू के एक नेता ने इशारों में बताया कि घोषणापत्र में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज और युवाओं के लिए स्टार्टअप फंडिंग जैसे प्रावधान हो सकते हैं।

बिहार की राजनीति हमेशा से ही घोषणापत्रों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन ने 'विकास' का नारा देकर एनडीए को सत्ता से बेदखल किया था, लेकिन 2020 में एनडीए ने वापसी की। इस बार चुनावी समर में विकास, जाति समीकरण और केंद्र-राज्य संबंध प्रमुख मुद्दे हैं। एनडीए को फायदा यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर को ही मुजफ्फरपुर और छपरा में रैलियां करेंगे, जो घोषणापत्र जारी होने के ठीक बाद होगा। इससे गठबंधन को अपार ऊर्जा मिलेगी।

विपक्ष की ओर से आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "एनडीए का घोषणापत्र देर से आ रहा है, क्योंकि उनके पास कहने को कुछ बचा ही नहीं। बिहार में बेरोजगारी 20 प्रतिशत से ऊपर है, अपराध बढ़ रहा है, और विकास का दावा खोखला है। जनता अब बदलाव चाहती है।" वहीं, कांग्रेस नेता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि इंडिया ब्लॉक का घोषणापत्र पहले ही बिहार को नई दिशा दे चुका है।

एनडीए के घोषणापत्र से जुड़ी यह प्रेस कॉन्फ्रेंस बिहार चुनावी अभियान का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। गठबंधन की एकजुटता और ठोस योजनाओं से वह विपक्ष को कड़ी टक्कर दे सकता है। बिहार की जनता की नजरें अब 30 अक्टूबर पर टिकी हैं। क्या यह घोषणापत्र एनडीए को तीसरी बार सत्ता की कुर्सी पर बिठा पाएगा? समय ही बताएगा। फिलहाल, पटना की राजनीतिक हलचल चरम पर है, और चुनावी बिगुल की गूंज पूरे राज्य में सुनाई दे रही है।

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