एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की नई सोशल साइंस की किताब में कई नए विषय जोड़े हैं। इस बार चुनाव आयोग, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR, ईवीएम, वीवीपैट, महिला आरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा को जगह दी गई है। नई किताब का मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और भारत की सांस्कृतिक विरासत के बारे में आसान भाषा में जानकारी देना बताया गया है।
SIR और चुनाव आयोग की जानकारी
किताब में चुनाव आयोग की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के साथ मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी निभाता है। SIR को मतदाता सूची को अपडेट, सत्यापित और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया बताया गया है। इसमें नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और मृत्यु, पता बदलने या दोहरे पंजीकरण जैसी स्थितियों में नाम हटाने की प्रक्रिया भी समझाई गई है।
ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर फोकस
नई किताब में ईवीएम, वीवीपैट, आदर्श आचार संहिता और मतदाता जागरूकता अभियान को भी चुनाव प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया गया है। छात्रों के लिए गतिविधि के तौर पर 1977, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बनी गठबंधन सरकारों का अध्ययन करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि वे लोकतांत्रिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझ सकें।
वेदों को भी मिली जगह
नई किताब में भारतीय ज्ञान परंपरा को भी प्रमुखता दी गई है। इसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का परिचय शामिल किया गया है। किताब के अनुसार वेद भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं। इनके माध्यम से धर्म, दर्शन, शिक्षा, समाज, संगीत और जीवन मूल्यों जैसी विषय-वस्तु को समझाया जाएगा।
महिला आरक्षण पर भी अध्याय
किताब में महिला आरक्षण और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर भी अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें बताया गया है कि मतदान में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी सीमित है। पंचायती राज संस्थाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी के उदाहरण देकर शासन में उनकी भूमिका को समझाने की कोशिश की गई है।
बदलते पाठ्यक्रम पर नजर
नई एनसीईआरटी किताब के जरिए छात्रों को लोकतंत्र, चुनाव प्रक्रिया और भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों की जानकारी देने का प्रयास किया गया है। चुनाव आयोग से लेकर SIR, ईवीएम, महिला आरक्षण और वेदों तक कई नए अध्याय शामिल होने के बाद यह किताब चर्चा का विषय बन गई है। अब देखना होगा कि नए पाठ्यक्रम को लेकर शिक्षा जगत और छात्रों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
