अगर आप बाहर का खाना खाते हैं या साफ पानी को लेकर लापरवाही करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। हेपेटाइटिस A वायरस दूषित पानी और भोजन के जरिए शरीर में पहुंचता है और सीधे लिवर पर हमला करता है। दिल्ली एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. शालीमार के मुताबिक कई मामलों में यह संक्रमण इतना गंभीर हो सकता है कि मरीज को एक्यूट लिवर फेलियर तक हो सकता है। इसलिए इसे सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कैसे फैलता है यह वायरस?
डॉक्टरों के अनुसार यह वायरस गंदे पानी, दूषित भोजन और खराब साफ-सफाई वाले माहौल में तेजी से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर में पहुंचने के बाद यह लिवर में सूजन पैदा करता है। खास बात यह है कि लक्षण दिखने से पहले भी संक्रमित व्यक्ति दूसरों तक वायरस फैला सकता है। यही वजह है कि समय पर सावधानी और स्वच्छता बेहद जरूरी मानी जाती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
हेपेटाइटिस A होने पर आंखें और त्वचा पीली पड़ सकती हैं। इसके अलावा बुखार, कमजोरी, भूख कम लगना, उल्टी, जी मिचलाना, पेट के दाईं ओर दर्द, दस्त और गहरे रंग का पेशाब भी इसके प्रमुख लक्षण हैं। अगर ऐसे संकेत दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
बच्चों और बड़ों में अलग दिखते हैं असर
विशेषज्ञ बताते हैं कि छोटे बच्चों में कई बार इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई ही नहीं देते। लेकिन किशोरों और वयस्कों में संक्रमण ज्यादा गंभीर हो सकता है। इस उम्र में पीलिया, तेज कमजोरी, बुखार और लिवर से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसलिए परिवार के सभी सदस्यों को इस बीमारी के बारे में जागरूक रहना चाहिए।
कैसे होती है जांच और क्या है बचाव?
हेपेटाइटिस A की पुष्टि ब्लड टेस्ट से की जाती है। इस जांच में शरीर में मौजूद HAV एंटीबॉडी की पहचान की जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि इससे भी ज्यादा जरूरी बचाव है। साफ पानी पीना, स्वच्छ भोजन करना और हाथों की सफाई रखना संक्रमण से बचने के आसान लेकिन असरदार तरीके हैं।
AIIMS डॉक्टर ने वैक्सीन पर दिया जोर
डॉ. शालीमार के मुताबिक हेपेटाइटिस A से बचने का सबसे प्रभावी तरीका वैक्सीन लगवाना है। यह टीका भारत में उपलब्ध है, लेकिन अभी भी बहुत से लोगों को इसकी जानकारी नहीं है। डॉक्टर की सलाह पर समय रहते वैक्सीन लगवाने से इस खतरनाक वायरस से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। खासकर बच्चों, किशोरों और जोखिम वाले लोगों के लिए यह सुरक्षा का मजबूत उपाय माना जाता है।
