जहां चिंगारी सुलगे वहीं तूफान उठता है और बंगाल की सियासत इस वक्त उसी मोड़ पर खड़ी है। मुर्शिदाबाद अब सिर्फ एक जिला नहीं बल्कि पूरे चुनाव का केंद्र बन चुका है। यहां बन रहा माहौल राज्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। हर दल अपनी रणनीति बदल रहा है और हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।
बाबरी मुद्दे ने बदली हवा
मुर्शिदाबाद में बाबरी से जुड़े मुद्दे ने अचानक सियासी तापमान बढ़ा दिया है। इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है और इसी के साथ चुनावी माहौल भी बदलता दिख रहा है। राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने में जुट गए हैं, जिससे पूरे प्रदेश में नई बहस छिड़ गई है।
ओवैसी-कबीर की जोड़ी से हलचल
असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर की जोड़ी ने इस इलाके को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। दोनों के मैदान में उतरने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है। माना जा रहा है कि ये जोड़ी कई सीटों पर असर डाल सकती है और इससे पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लग सकती है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
ममता के लिए बढ़ी चुनौती
मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में अल्पसंख्यक वोट अहम भूमिका निभाते हैं। अब तक यह समर्थन ममता बनर्जी के साथ मजबूती से जुड़ा रहा है, लेकिन इस बार नई एंट्री ने उनके लिए चुनौती खड़ी कर दी है। अगर वोटों का बंटवारा हुआ तो इसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
बीजेपी का ध्रुवीकरण दांव
दूसरी तरफ बीजेपी इस पूरे घटनाक्रम को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश में लगी है। बाबरी मुद्दे के जरिए हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति पर काम हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि इस बार ध्रुवीकरण पहले से ज्यादा प्रभावी हो सकता है, जिससे मुकाबला और तीखा हो जाएगा।
योगी की एंट्री से बढ़ेगा तापमान
अब सबसे बड़ी चर्चा योगी आदित्यनाथ की संभावित एंट्री को लेकर है। अगर वे मुर्शिदाबाद में प्रचार करते हैं तो यह सिर्फ एक रैली नहीं बल्कि चुनाव का टर्निंग पॉइंट बन सकता है। उनकी सभाएं माहौल बदलने के लिए जानी जाती हैं। ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि यह सियासी चक्रव्यूह किसके लिए जीत का रास्ता खोलेगा और किसके लिए चुनौती बन जाएगा।
