संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई 2025 से शुरू हो चुका है, जो 21 अगस्त तक चलेगा। यह सत्र 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और इसके जवाब में 6-7 मई 2025 को भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर की गई एयरस्ट्राइक, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया था। इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया, जिसमें करीब 100 आतंकवादी मारे गए थे।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में विपक्ष ने सरकार पर कई सवाल उठाए, जिसके चलते पहले दिन ही लोकसभा में हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने ऑपरेशन की सफलता, कूटनीतिक प्रभाव, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम के दावों पर जवाब मांगा।
हंगामे की शुरुआत
लोकसभा में सत्र के पहले दिन विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की मांग की। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। विपक्ष का कहना था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति कमजोर हुई और सरकार को इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
विपक्ष के सवाल
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि पहलगाम हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आतंकियों को अब तक क्यों नहीं पकड़ा गया। उन्होंने मांग की कि इस पर संसद में बहस हो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब दें।
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर को किसी भी देश ने समर्थन नहीं दिया, जिससे भारत की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई। उन्होंने 1965, 1971 और कारगिल युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि पहले भारत को कई देशों का समर्थन मिलता था, लेकिन अब कोई भी देश भारत के साथ नहीं है।
विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर सवाल उठाए, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच 20 से अधिक बार युद्धविराम करवाया। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस पर नोटिस देकर पीएम से जवाब मांगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और पवन खेड़ा ने इंडोनेशिया में भारतीय रक्षा अताशे के कथित बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने लड़ाकू विमान खोए। उन्होंने सरकार पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। हालांकि, भारतीय दूतावास ने इन खबरों को भ्रामक बताते हुए खंडन किया।
सरकार का जवाब
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले सहित सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन यह संसद के नियमों और परंपराओं के तहत होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम किसी भी मुद्दे से पीछे नहीं हटेंगे। संसद में हर सवाल का जवाब दिया जाएगा।
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि पीएम नरेंद्र मोदी महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान सदन में मौजूद रहेंगे। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में केवल आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, न कि सैन्य या नागरिक ढांचे को। उन्होंने इसे "नपा-तुला और गैर-उकसावे वाला" ऑपरेशन बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। उन्होंने रामचरित मानस की चौपाई "जिन मोहि मारा, तिन मोहि मारे" का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने केवल उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने निर्दोष लोगों को मारा। गृह मंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य ताकत और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दर्शाने वाला बताया।
विपक्षी नेताओं ने दी प्रतिक्रियाएँ
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार से पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को बिहार चुनाव से पहले इस मुद्दे पर संसद में बहस करनी चाहिए। राउत ने ऑपरेशन सिंदूर को "विफल" करार देते हुए कहा कि राष्ट्रहित में विपक्ष इस पर ज्यादा नहीं बोल रहा।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने ऑपरेशन को बधाई दी, लेकिन पाकिस्तान के इनकार पर सवाल उठाए कि वह आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं रखता। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पहलगाम हमले में खुफिया नाकामी और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विमानों के नुकसान के दावे को उठाया।



