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मोदी हमेशा मेरा दोस्त रहेगा... अचानक क्यों बदले डोनाल्ड ट्रंप के सुर

मोदी हमेशा मेरा दोस्त रहेगा... अचानक क्यों बदले डोनाल्ड ट्रंप के सुर

भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में रूस से तेल आयात और टैरिफ को लेकर तनाव देखा गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 50% टैरिफ (25% और फिर अतिरिक्त 25%) लगाया था, जिसे भारत ने "अनुचित और अन्यायपूर्ण" बताया।

इस टैरिफ का असर भारत के टेक्सटाइल, गहने, चमड़ा, खाद्य और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका है। ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि "लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है," जिसके साथ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक तस्वीर साझा की थी। इस बयान ने दोनों देशों के बीच तनाव को और उजागर किया।

ट्रंप का नया रुख

5 सितंबर 2025 को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने अपने रुख में नरमी दिखाई। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। वह एक शानदार प्रधानमंत्री हैं। भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है। चिंता की कोई बात नहीं है। कभी-कभी छोटी-मोटी बातें हो जाती हैं।" ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें भारत के रूस से तेल खरीदने का फैसला पसंद नहीं है, लेकिन उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को "विशेष" और "मजबूत" बताया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारत को "चीन के हाथों खोने" के अपने पिछले बयान पर कायम हैं, तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमने भारत को खोया है।"

ट्रंप ने अपनी और मोदी की दोस्ती को रेखांकित करते हुए कहा, "मेरी मोदी के साथ बहुत अच्छी बनती है। वह कुछ महीने पहले व्हाइट हाउस आए थे, और हम रोज गार्डन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए साथ थे।" यह बयान हाल ही में चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के बाद आया, जहां मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समिट ने अमेरिका को भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक महत्व को फिर से आंकने के लिए मजबूर किया।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के सकारात्मक बयान का तुरंत जवाब दिया। 6 सितंबर 2025 को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "मैं राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों के सकारात्मक मूल्यांकन की गहराई से सराहना करता हूं और पूरी तरह से उनका समर्थन करता हूं। भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और दूरदर्शी व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है।" इस पोस्ट में मोदी ने ट्रंप को टैग भी किया, जिसे कूटनीतिक शैली में एक सकारात्मक और संतुलित जवाब माना जा रहा है।

मोदी की प्रतिक्रिया ने भारत की उस नीति को रेखांकित किया, जिसमें वह तीखी प्रतिक्रिया देने के बजाय संयम और तर्क के साथ अपनी स्थिति स्पष्ट करता है। भारत ने यह भी साफ किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा, चाहे वह रूस से तेल खरीद हो या अन्य कूटनीतिक गठजोड़।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बदले हुए रुख के पीछे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और हाल के SCO समिट में भारत, रूस और चीन की बढ़ती नजदीकी का प्रभाव है। भारत ने अमेरिका के दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीद जारी रखी और चीन के साथ संबंधों में सुधार किया, जिसने अमेरिका को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप का यह बयान भारत को फिर से अपनी रणनीतिक धुरी में लाने की कोशिश हो सकती है, क्योंकि भारत का वैश्विक मंच पर बढ़ता प्रभाव अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है।

एक जर्मन मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ विवाद के दौरान ट्रंप ने मोदी को चार बार फोन किया, लेकिन मोदी ने उनका कॉल नहीं उठाया, जिसे भारत की सख्त कूटनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों, जैसे पीटर नवारो, ने भारत पर रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को "फंड" करने का आरोप लगाया, जिसे भारत ने "भ्रामक और गलत" बताकर खारिज कर दिया।

भारत की स्थिति

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच का रिश्ता हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह साझेदारी साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत जनसंपर्क पर आधारित है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत जारी है और भारत आपसी सम्मान के आधार पर इस रिश्ते को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि व्यापार वार्ताओं में धैर्य की जरूरत होती है और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है।

ट्रंप के सकारात्मक बयान और मोदी की संतुलित प्रतिक्रिया ने दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद जगाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। हालांकि, टैरिफ विवाद और रूस से तेल खरीद को लेकर मतभेद अभी भी बने हुए हैं। यह देखना बाकी है कि क्या ट्रंप प्रशासन टैरिफ को कम करने या हटाने पर विचार करेगा, या भारत अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहते हुए अमेरिका के साथ संतुलन बनाएगा।

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