सोना छोड़ो कॉपर पकड़ो, पीएम मोदी की अपील के बाद बदल सकती है भारत की पूरी आर्थिक रणनीति, जानिए कैसे ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाड़ी संकट और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच देशवासियों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है और इसके लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करना पड़ता है। उन्होंने लोगों से जरूरत के हिसाब से खर्च करने और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। पीएम के इस बयान के बाद देशभर में सोना और कॉपर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
कॉपर को बताया भविष्य का सोना
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कॉपर को भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण धातु बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और डिजिटल टेक्नोलॉजी में कॉपर की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी। इसलिए भारत को विदेशी बाजार पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू उत्पादन बढ़ाना होगा। पीएम मोदी का मानना है कि आने वाले वर्षों में कॉपर की मांग सोने की तरह तेजी से बढ़ सकती है और यही वजह है कि इसे भविष्य का सोना कहा जा रहा है।
भारत में कितना होता है उत्पादन
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक भारत में पिछले पांच वर्षों में सोने का उत्पादन लगातार बढ़ा है। साल 2020-21 में देश में 1127 किलोग्राम सोना पैदा हुआ था जो 2024-25 में बढ़कर 1627 किलोग्राम तक पहुंच गया। वहीं कॉपर उत्पादन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2023-24 में देश में 125230 टन कॉपर का उत्पादन हुआ था लेकिन 2024-25 में यह घटकर 105012 टन रह गया। इसके बावजूद सरकार कॉपर उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
सरकार ने शुरू की बड़ी तैयारी
खनन क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। केंद्र सरकार ने 2015 के बाद अब तक 28 गोल्ड ब्लॉकों और 11 कॉपर ब्लॉकों की नीलामी की है। इसके अलावा नई एक्सप्लोरेशन लाइसेंस व्यवस्था भी लागू की गई है जिससे निजी एजेंसियों को खनिज खोजने की अनुमति दी जा रही है। सरकार का फोकस अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने पर है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाया जा सके।
डॉलर बचाने पर सरकार का फोकस
खाड़ी संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की रणनीति पर काम कर रही है। भारत हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करता है और इसके बदले अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में अगर लोग कुछ समय तक सोने की खरीद कम करते हैं तो देश की आर्थिक स्थिति को राहत मिल सकती है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने सीधे जनता से अपील करते हुए संयम बरतने की बात कही है।
नई आर्थिक सोच की शुरुआत
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पीएम मोदी का यह बयान सिर्फ सोना खरीदने की अपील नहीं बल्कि आने वाले समय की आर्थिक दिशा का संकेत है। सरकार अब उन सेक्टरों पर ज्यादा जोर दे रही है जो भविष्य की टेक्नोलॉजी और ऊर्जा जरूरतों से जुड़े हैं। कॉपर उसी रणनीति का अहम हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या लोग पीएम मोदी की अपील मानकर सोने से दूरी बनाएंगे और क्या भारत सच में कॉपर की ताकत से नई आर्थिक उड़ान भर पाएगा।
