न्यूजप्लस डेस्क। राजेश द्विवेदी
दिल्ली के पूर्व सीएम अरविन्द केजरीवाल भी गजब के राजनेता निकले। मंगलवार को उनका दर्द बाहर आया या चोर , यह तो वही जाने पर ईमानदारी का नकली चोला उन्होंने अभी छोड़ा नहीं। चाहे दिल्ली या देश के राजनीतिक गलियारे हों, केजरीवाल हाशिए पर चले गए हैं। उनकी विश्वसनीयता पर डेंट ही डेंट दिख रहे हैं। जानकार कहते हैं कि विश्वसनीयता एक बार जख्मी हुई तो फिर लौटती नहीं है। इंदिरा गांधी जरुर अपवाद रहीं पर अब इमरजेंसी लगती तो शायद ही कमबैक का फार्मूला काम करता।
आप की पंजाप्ब में सरकार है। इसी कड़ी में पंजाब के आनंदपुर साहिब में मंगलवार को सिख धर्म के 9वें गुरु श्रीगुरु तेग बहादुर साहिब की 350 वीं शहीदी शताब्दी के समापन समारोह में केजरीवाल ने दर्शन और बौद्धिक दिया पर उसमें दम्भ की बू आ रही थी। गुरु के सामने कह रहे थे कि अगर हमने एक पैसा भी बेईमानी की हो तो गुरु साहिब हमें माफ नहीं करना है। भारत में धर्म-मजहब के नाम पर लड़ाइयां हो रही है लेकिन अगर हम गुरु साहिब के संदेश अपना लें तो झगड़े स्वत: खत्म हो जाएंगे। पंजाब में हम ईमानदारी से सरकार चला रहे हैं। एक-एक पैसा जनता पर खर्च कर रहे हैं। केजरीवाल यह बात क्यों कह रहे हैं? क्या पंजाब सरकार पर उंगली उठने लगीं हैं? केजरीवाल पानी डालने की कितनी भी कोशिश कर लें पर अगले विधानसभा चुनाव में उन्हें और उनकी पार्टी को जवाब देना होगा क्योंकि पंजाब सरकार लगातार सवालों के घेरे में है। एक बात और, केजरीवाल परोक्ष रुप से ईमानदारी की बात करें पर बेईमानी का कोई पैमाना नहीं होता है। बेईमानी के ढेरों आयाम हैं , सिर्फ पैसे से उसे तौलना जायज नहीं है इसलिए केजरीवाल जब-जब चुनाव लड़ेंगे, उनसे सवाल तो किए ही जाएंगे।



