उत्तराखंड का वो मंदिर जहां बादलों के ऊपर होते हैं दर्शन, 800 सीढ़ियां चढ़ते ही दिखता है स्वर्ग जैसा नजारा
गर्मियों की छुट्टियों में अगर आप उत्तराखंड घूमने का प्लान बना रहे हैं और भीड़भाड़ से दूर किसी शांत धार्मिक जगह की तलाश में हैं, तो रुद्रप्रयाग जिले में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। समुद्र तल से करीब 3050 मीटर की ऊंचाई पर बना यह मंदिर हिमालय की गोद में बसा हुआ है। यहां पहुंचते ही ठंडी हवाएं, बादलों से ढकी चोटियां और चारों तरफ फैला प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यही वजह है कि अब यह मंदिर धीरे-धीरे श्रद्धालुओं और ट्रैवलर्स की पसंदीदा जगह बनता जा रहा है।
भगवान कार्तिकेय को समर्पित अनोखा मंदिर
कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तर भारत का एकमात्र प्रमुख मंदिर माना जाता है जो भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान कार्तिकेय ने अपने माता-पिता के प्रति सम्मान जताते हुए अपने शरीर का मांस त्याग दिया था और उनकी अस्थियां इसी पर्वत पर स्थापित हुई थीं। मंदिर के गर्भगृह में आज भी भगवान कार्तिकेय की अस्थियों की पूजा की जाती है। यही वजह है कि यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है।
360 डिग्री हिमालय व्यू बना रहा खास
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसका अद्भुत लोकेशन पॉइंट है। मंदिर एक संकरी पहाड़ी चोटी पर बना हुआ है, जहां से चौखंबा, नंदा देवी, त्रिशूल, केदारनाथ और बंदरपूंछ जैसी बर्फ से ढकी चोटियों का 360 डिग्री नजारा दिखाई देता है। सुबह और शाम के समय यहां का सनराइज और सनसेट किसी सपने जैसा लगता है। बादलों के बीच से निकलती सूरज की किरणें पूरे वातावरण को बेहद अलौकिक बना देती हैं।
800 सीढ़ियां और घंटियों की गूंज
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 800 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। पूरे रास्ते में हजारों छोटी-बड़ी घंटियां बंधी हुई हैं, जो ठंडी हवाओं के साथ एक अलग ही आध्यात्मिक माहौल बनाती हैं। कनकचौरी गांव से मंदिर तक करीब 3 किलोमीटर का ट्रेक है, जो काफी आसान माना जाता है। यही वजह है कि बच्चे और बुजुर्ग भी इस यात्रा को आराम से पूरा कर लेते हैं। रास्ता बुरांश और घने जंगलों के बीच से गुजरता है, जिससे सफर और भी खूबसूरत हो जाता है।
कैसे पहुंचे कार्तिक स्वामी मंदिर
कार्तिक स्वामी मंदिर पहुंचने के लिए सबसे पहले रुद्रप्रयाग पहुंचना होता है। यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट जौलीग्रांट एयरपोर्ट है, जबकि नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश और योग नगरी ऋषिकेश हैं। रुद्रप्रयाग से करीब 40 किलोमीटर दूर कनकचौरी गांव इस ट्रेक का बेस पॉइंट है। यहां तक टैक्सी और लोकल जीप आसानी से मिल जाती हैं। कनकचौरी में बजट होटल, होमस्टे और गढ़वाली खाने की अच्छी सुविधा भी उपलब्ध है। हालांकि शाम के समय यहां काफी ठंड हो जाती है, इसलिए हल्के गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी माना जाता है।
