कानपुर के डीएम-सीएमओ विवाद में बुधवार को तब नया मोड़ आ गया जब सस्पेंडेड सीएमओ स्टे लेकर फिर कुर्सी पर विराजमान हो गए। इस विवाद में कानपुर के जनप्रतिनिधि दो पालों में बंटे, मामला लखनऊ पहुंचा तो प्रदेश की शीर्ष सत्ता में भी कलह सामने आयी।
बता दें एक डिप्टी सीएम नहीं चाहते थे सीएमओ हटाए जाएं लेकिन सीएम के आदेश पर वह सस्पेंड हो गए। सस्पेंशन के बाद सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमि ने न केवल डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला बल्कि सरकार के खिलाफ भी खड़े हो गए, अंतत कोर्ट में उन्होंने सरकार को परास्त कर स्टे पा लिया और अपनी कुर्सी पर फिर से काबिज हो गए।
कानपुर का डीएम-सीएमओ विवाद उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा में आया जब इसमें भाजपा के ही जनप्रतिनिधि दो खेमों में बंट गए। विवाद की शुरुआत डीएम के कुछ सरकारी अस्पतालों में औचक निरीक्षण और अधिकारिय़ों से लेकर स्वास्थ्य कर्मियों तक पर कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ।
डीएम ने बैठक से सीएमओ के बेइज्जत करके निकाला तो बात लखनऊ के अफसरों तक पहुंच गई। डीएम ने सीएमओ को कानपुर से हटाने के लिए शासन को पत्र लिख दिया। विवाद तब चरम पर पहुंच गया जब यूपी के विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, विधायक सुरेन्द्र मैथानी एमएलसी अरुण पाठक ने CMO को अच्छा अधिकारी बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम ब्रजेश पाटक को पत्र लिखे और उनको कानपुर से न हटाने का अनुरोध किया। इसके जवाब में विधायक अभिजीत सिंह सांगा, महेश त्रिवेदी और पूर्व विधायक नीरज चतुर्वेदी ने डीएम का पक्ष लेते हुए सीएमओ को तुरंट हटाने के लिए पत्र लिखे।
डिप्टी सीएम जब तक सीएमओ को हटाने का फैसला कर पाते सीएम योगी आदित्यनाथ ने हस्तक्षेप किया और सीएमओ को 19 जून 2025 को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। सस्पेंड होते ही सीएमओ ने मीडिया को बुलाकर डीएम के खिलीफ जहर उगला और सरकार के आदेश के खिलाफ कोर्ट जाने का ऐलान कर दिया। लोग विवाद भूलने लगे थे कि बुधवार को सुबह ठीक 10 बजे सीएमओ डॉ हरिदत्त नेमी कार्यालय पहुंच गए और सीएमओ की कुर्सी पर बैठकर काम शुरू कर दिया। उन्होंने ताबड़तोड़ कई आदेश भी कर डाले कुछ देर बाद सरकार से तैनात डॉ. उदयनाथ पहुंच गए। कुर्सी को लेकर दोनों में विवाद शुरू हो गया तो पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
डॉ. नेमी ने बताया उनके पास हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से पद पर बने रहने का स्टे मिला है। उन्होंने साफ कर दिया कि उनके निलंबन के साथ स्थानांतरण पर भी रोक लगाई है। उन्होंने हाईकोर्ट के जस्टिस मनीष माथुर की पीठ ने 8 जुलाई 2025 का आदेश दिखाया जिसमें उनके निलंबन आदेश को नियम-विरुद्ध मानते हुए अगली सुनवाई तक इस पर रोक लगाई है। ….कोर्ट ने माना कि निलंबन की प्रक्रिया में उचित विभागीय जांच और सुनवाई का पालन नहीं किया गया। इस फैसले के बाद डॉ. नेमी ने कहा, "हाई कोर्ट का यह आदेश प्रशासनिक कार्रवाइयों में निष्पक्षता और कानून के शासन को मजबूत करता है…उन्होंने कहाकि कानपुर लौटकर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सीएमओ के लौटने के बाद डीएम के पक्ष में खड़े जनप्रतिनिधि फिर सक्रिय हो गए हैं, आदेश के खिलाफ जाने पर सरकार ने भी इसे गंभीरता से लिया है। सरकार की ओर से अगली सुनवाई में मजबूती से अपना पक्ष रखने की तैयारी शुरू कर दी गई है…..कुल मिलाकर विवाद रोटक मोड़ पर पहुंच गया है कानपुर के जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकार की किरकिरी को लेकर न केवल स्वास्थ्य महकमा बल्कि आम जनता भी चटकारे ले रही है, लोग कह रहे हैं तो क्या कानपुर में अब दो सीएमओ काम करेंगे और ऐसा होगा तो किसका आदेश महकमे में लागू होगा।



