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जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने इस्तीफे का ऐलान किया

जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने इस्तीफे का ऐलान किया

जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने 7 सितंबर 2025 को अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला लिया है। इशिबा ने यह कदम सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) में संभावित फूट को रोकने और पार्टी को एकजुट करने के लिए उठाया गया है। इस घोषणा ने जापानी राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि इशिबा का कार्यकाल बेहद संक्षिप्त रहा, जो उन्होंने 1 अक्टूबर 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा के इस्तीफे के बाद शुरू किया था।

शिगेरू इशिबा को 27 सितंबर 2024 को एलडीपी का नेता चुना गया था, जिसके बाद वे जापान के प्रधानमंत्री बने। हालांकि, उनके नेतृत्व में पार्टी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हाल के आम चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप संसद के दोनों सदनों में बहुमत खो गया।

इसके अलावा, जापान में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत ने मतदाताओं में असंतोष पैदा किया, जिसका असर एलडीपी की लोकप्रियता पर पड़ा। पार्टी के भीतर असहमति बढ़ रही थी, और कुछ नेताओं ने असाधारण नेतृत्व चुनाव की मांग की थी। इन परिस्थितियों में, इशिबा ने पार्टी में विभाजन से बचने के लिए इस्तीफा देने का निर्णय लिया ताकि नया नेतृत्व चुना जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, इशिबा ने 7 सितंबर 2025 को शाम 6 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा करने की योजना बनाई है। एलडीपी के सांसद सोमवार को एक बैठक में असाधारण नेतृत्व चुनाव पर फैसला करेंगे, जिसके बाद नया नेता चुना जाएगा। चूंकि एलडीपी और उसके गठबंधन को संसद में बहुमत प्राप्त नहीं है, इसलिए नया प्रधानमंत्री चुनने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।

शिगेरू इशिबा का कार्यकाल

शिगेरू इशिबा, जो पूर्व रक्षा मंत्री रहे हैं, राष्ट्रीय सुरक्षा और ताइवान के लोकतंत्र के समर्थन के लिए जाने जाते हैं। उनके नेतृत्व में, जापान ने हाल ही में अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता किया, जिसमें अमेरिका ने जापान पर 15% आधारभूत टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।

इशिबा ने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में 27 अक्टूबर 2024 को जल्दी संसदीय चुनाव कराने की घोषणा की थी, ताकि पार्टी को एकजुट किया जा सके और जनता का विश्वास दोबारा हासिल किया जा सके। हालांकि, चुनाव में एलडीपी की हार ने उनकी स्थिति को और कमजोर कर दिया।

जापान की राजनीति पर प्रभाव

इशिबा का इस्तीफा जापानी राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। एलडीपी, जो 2012 से सत्ता में है, हाल के वर्षों में कई विवादों में घिरी रही है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप और यूनिफिकेशन चर्च के साथ संबंध शामिल हैं। इन विवादों ने पार्टी की लोकप्रियता को काफी नुकसान पहुंचाया है।

नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी जनता का विश्वास दोबारा हासिल करना और आर्थिक चुनौतियों, जैसे महंगाई और वैश्विक व्यापार तनावों, से निपटना। इसके अलावा, जापान की रक्षा नीतियां और भारत, अमेरिका जैसे सहयोगी देशों के साथ संबंध भी नए नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

भारत-जापान संबंध

शिगेरू इशिबा के कार्यकाल में भारत और जापान के बीच संबंध मजबूत रहे। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान का दौरा किया, जहां उन्होंने इशिबा के साथ बुलेट ट्रेन में सफर किया और 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार किया, जिसमें 10 ट्रिलियन येन के निजी निवेश और चंद्रयान-5 मिशन के लिए सहयोग शामिल है।

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