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जापान को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री: मोदी और ट्रम्प ने दी बधाई

जापान को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री: मोदी और ट्रम्प ने दी बधाई

जापान की राजनीति में ऐतिहासिक क्षण आ गया है। सानाए ताकाइची को मंगलवार को संसद द्वारा जापान का पहला महिला प्रधानमंत्री चुना गया। यह नियुक्ति रातोंरात गठबंधन सौदे के बाद हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। ताकाइची, जो खुद को 'जापान की मार्गरेट थैचर' कहती हैं, कट्टर रूढ़िवादी नेता के रूप में जानी जाती हैं। वे मजबूत सैन्य शक्ति और युद्धोत्तर संविधान में संशोधन की प्रबल समर्थक हैं। इस ऐतिहासिक जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बधाई संदेश जारी किए हैं, जो द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने का संकेत देते हैं।

जापान की संसद के ऊपरी और निचले सदनों में हुए मतदान में ताकाइची ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) की इस 63 वर्षीय नेता को अंतिम मंजूरी सम्राट से मिलने की उम्मीद है। यह नियुक्ति पूर्व प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के इस्तीफे के बाद हुई, जिनकी सरकार अल्पमत में थी। ताकाइची की जीत ने न केवल लिंग आधारित कांच की छत तोड़ी, बल्कि जापान की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति में भी बड़ा बदलाव लाने का वादा किया है। हालांकि, उनकी सरकार अभी बहुमत के बिना है, जो संसदीय चुनौतियों को जन्म दे सकती है।

ताकाइची का राजनीतिक सफर प्रेरणादायक रहा है। 2002 में पहली बार सांसद चुनी गईं ताकाइची पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की शिष्या रही हैं। आबे की हत्या के बाद वे उनकी नीतियों की सबसे कट्टर रक्षक बनीं। वे जापान के युद्धोत्तर संविधान के अनुच्छेद 9 में संशोधन की मांग लंबे समय से कर रही हैं, जो देश को युद्ध त्यागने और सैन्य बल रखने पर प्रतिबंध लगाता है। ताकाइची का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में जापान को अपनी रक्षा क्षमता मजबूत करनी चाहिए। "जापान को अब निष्क्रियता छोड़कर सक्रिय भूमिका निभानी होगी," उन्होंने हाल ही में एक साक्षात्कार में कहा। उनकी दृष्टि में, संविधान संशोधन से जापान अमेरिका के साथ 'अर्ध-सुरक्षा गठबंधन' बना सकता है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता का मुकाबला करेगा।

सैन्य मजबूती पर ताकाइची की नीतियां कठोर हैं। वे रक्षा बजट को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 2% तक बढ़ाने की वकालत करती हैं, जो वर्तमान 1% से दोगुना है। जापान की सेना को 'स्व-रक्षा बल' से ऊपर उठाकर पूर्ण सैन्य शक्ति प्रदान करने की उनकी योजना विवादास्पद रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम जापान को क्षेत्रीय तनावों – जैसे दक्षिण चीन सागर और ताइवान जलडमरूमध्य – में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार करेगा। हालांकि, विपक्षी दल और शांति समर्थक संगठन इसे 'मिलिट्रीकरण' बता रहे हैं, जो जापान की शांतिप्रिय छवि को धूमिल कर सकता है।

इस ऐतिहासिक घटना पर वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएं तीव्र आई हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर बधाई देते हुए कहा, "हृदय से बधाई, सानाए ताकाइची जी। भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए आपके साथ निकट सहयोग की अपेक्षा करता हूं।" मोदी का यह संदेश दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग को रेखांकित करता है। भारत और जापान क्वाड (क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग) के सदस्य हैं, और ताकाइची की नीतियां इस गठबंधन को नई ऊर्जा दे सकती हैं।

इसी तरह, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अक्टूबर को ही ताकाइची को बधाई दी थी, जब उनकी जीत लगभग तय हो गई थी। ट्रंप ने कहा, "जापान की नई नेता को बधाई। हम मजबूत जापान-अमेरिका संबंधों को और गहरा करेंगे।" ट्रंप की यह प्रतिक्रिया उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के अनुरूप है, जहां वे सहयोगी देशों से अधिक रक्षा खर्च की मांग करते रहे हैं। ताकाइची की सैन्य नीतियां ट्रंप के एजेंडे से मेल खाती हैं, जो एशिया में चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए जापान को मजबूत बनाना चाहते हैं। ट्रंप का दौरा कुछ दिनों में होने वाला है, जो नई सरकार के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा होगा।

ताकाइची की नियुक्ति का जापान की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। वे आबे की 'अबेनॉमिक्स' नीतियों की अनुयायी हैं, जो मौद्रिक ढील, राजकोषीय उत्तेजना और संरचनात्मक सुधारों पर आधारित हैं। महंगाई और येन की कमजोरी से जूझ रहे जापान में उनकी सरकार को तत्काल आर्थिक पैकेज लाने की चुनौती है। इसके अलावा, महिलाओं के अधिकारों पर उनकी कुछ विवादास्पद टिप्पणियां – जैसे कार्यस्थल पर लिंग समानता के बजाय पारंपरिक भूमिकाओं पर जोर – आलोचना का शिकार बनी हैं। फिर भी, एक महिला के रूप में उनकी सफलता जापानी समाज में लैंगिक समानता की बहस को गति देगी।

क्षेत्रीय संदर्भ में, ताकाइची की विदेश नीति चीन और उत्तर कोरिया के प्रति कठोर रहेगी। वे ताइवान को समर्थन देने और दक्षिण कोरिया के साथ ऐतिहासिक विवादों को सुलझाने की बात करती हैं। लेकिन उनकी अल्पमत सरकार को विपक्ष के साथ समझौते करने पड़ेंगे, जो नीतिगत स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह जापान के लिए 'अस्थिरता के साथ प्रगति' का दौर होगा।

जापान की जनता की प्रतिक्रिया मिश्रित है। टोक्यो की सड़कों पर कुछ युवा उत्साहित हैं, जबकि बुजुर्ग शांति समर्थक चिंतित। एक सर्वे में 55% लोगों ने उनकी नियुक्ति का स्वागत किया, लेकिन 40% ने सैन्य नीतियों पर सवाल उठाए। ताकाइची ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "मैं जापान को मजबूत, समृद्ध और शांतिप्रिय बनाऊंगी।"

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