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आजम खान की तरह जेल से रिहा हो रहे इरफान सोलंकी?

आजम खान की तरह जेल से रिहा हो रहे इरफान सोलंकी?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ आ रहा है। समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता आजम खान की तर्ज पर अब पूर्व विधायक इरफान सोलंकी भी जेल की सलाखों से बाहर आने की कगार पर हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इरफान सोलंकी को आगजनी मामले में जमानत दे दी है, जो 2022 के एक विवादास्पद केस से जुड़ा है। हालांकि, कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिससे सोलंकी की विधायकी पर खतरा बरकरार है। यह फैसला सपा के लिए दोहरी खुशी और चिंता का सबब बन गया है, खासकर आगामी उपचुनावों के मद्देनजर।

इरफान सोलंकी, जो कानपुर के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं, पर 2022 में एक महिला के घर में आग लगाने का आरोप लगा था। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह घटना जमीन हड़पने की नीयत से की गई थी। जून 2024 में ट्रायल कोर्ट ने सोलंकी, उनके छोटे भाई रिजवान और तीन अन्य सहयोगियों को सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद सोलंकी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसमें जमानत के साथ-साथ सजा पर स्टे की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 14 नवंबर 2024 को सुनवाई के बाद जमानत मंजूर कर ली, लेकिन सजा पर रोक लगाने से साफ मना कर दिया। जस्टिस ने तर्क दिया कि सजा का असर ट्रायल पर पड़ सकता है, लेकिन जमानत के लिए कोई ठोस आपत्ति नहीं है। सोलंकी के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि यह राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और साक्ष्य कमजोर हैं। अब सोलंकी जेल से बाहर आ सकेंगे, लेकिन उनकी सजा बरकरार रहने से विधानसभा सदस्यता पर असर पड़ सकता है।

आजम खान से समानत

यह जमानत आजम खान की हालिया रिहाई से गहराई से जुड़ी हुई लग रही है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान, जो 23 महीने जेल में बिताने के बाद 23 सितंबर 2025 को ही सीतापुर जेल से रिहा हुए, को भी क्वालिटी बार कब्जे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। आजम पर भी 80 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए। सपा ने हमेशा इन्हें भाजपा सरकार की 'राजनीतिक साजिश' करार दिया है। ठीक इसी तरह, इरफान सोलंकी के समर्थक और पत्नी नसीम सोलंकी (जो अब सीसामऊ उपचुनाव लड़ रही हैं) का कहना है कि यह केस भी सपा को कमजोर करने की कोशिश है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आजम खान के जेल से बाहर आने पर कहा था, "यह न्याय की जीत है। भाजपा की तानाशाही अब टूट रही है।" सोलंकी मामले में भी अखिलेश की चुप्पी पर सवाल उठे थे, लेकिन जमानत के बाद पार्टी ने इसे 'सत्य की विजय' बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों मामलों में सपा मुस्लिम-यादव वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, खासकर पश्चिमी यूपी में।

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सियासी प्रभाव

इरफान सोलंकी की जमानत सीसामऊ विधानसभा उपचुनाव के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जो 20 नवंबर 2024 को हुआ था। सोलंकी की सजा के कारण उनकी विधायकी रद्द हो गई थी, और सपा ने उनकी पत्नी नसीम को टिकट दिया। नसीम ने जमानत फैसले पर कहा, "यह न्याय का फैसला है। इरफान निर्दोष हैं, और अब हमारी लड़ाई मजबूत हो गई।" हालांकि, सजा पर स्टे न मिलने से अगर अपील खारिज हुई, तो सपा को फिर से उम्मीदवार बदलना पड़ सकता है।

आजम खान की रिहाई के बाद रामपुर और आसपास के इलाकों में सपा की हलचल बढ़ गई है। खान ने जेल से बाहर आते ही कहा, "अटकलें लगाने वालों से ही पूछिए। मैं बसपा या कहीं नहीं जा रहा।" लेकिन सोलंकी के मामले में भी ऐसी ही अटकलें हैं कि क्या यह सपा की एकजुटता को मजबूत करेगा या आंतरिक कलह बढ़ाएगा? भाजपा ने दोनों रिहाइयों को 'कोर्ट का फैसला' बताते हुए सपा पर हमला बोला है, कहते हुए कि 'ये लोग हमेशा कानून से ऊपर खुद को रखते हैं।

जमानत vs सजा का द्वंद्व

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हालिया जमानत दिशानिर्देशों से प्रेरित लगता है। सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में कहा है कि 'गिरफ्तारी अपवाद है, नियम नहीं।' आजम खान को भी सफाई मशीन चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, जो सोलंकी केस के लिए मिसाल बन सकता है। लेकिन सजा पर स्टे न मिलना साफ संकेत देता है कि कोर्ट ट्रायल की पवित्रता बनाए रखना चाहता है। सोलंकी को अब सुप्रीम कोर्ट में अपील का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।

सपा की वापसी का संकेत?

आजम खान और इरफान सोलंकी की जमानतें यूपी की सियासत में सपा के लिए सकारात्मक संकेत हैं। लंबे समय से जेल में सड़ते नेताओं की रिहाई से पार्टी का मनोबल ऊंचा हुआ है। लेकिन सजा और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना अभी बाकी है। क्या यह रिहाइयां 2027 के विधानसभा चुनावों में सपा को मजबूती देंगी, या भाजपा इन्हें कमजोरी के रूप में पेश करेगी? समय ही बताएगा। फिलहाल, कानपुर और रामपुर की सड़कों पर सपा कार्यकर्ताओं का जश्न जारी है।

कौन हैं इरफान सोलंकी? 18 आपराधिक मामलों से घिरे


समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी इन दिनों सुर्खियों में हैं। कानपुर के सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके सोलंकी को हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट से आगजनी मामले में जमानत मिली है। हालांकि उनकी सात साल की सजा बरकरार है, जिससे उनकी विधायकी पर संकट मंडरा रहा है।

राजनीतिक सफर

इरफान सोलंकी सपा के पुराने चेहरों में गिने जाते हैं। उनके पिता हाजी मुस्ताक सोलंकी भी विधायक रह चुके हैं। 2007 से लेकर 2022 तक सोलंकी लगातार सीसामऊ सीट से सपा के टिकट पर जीतते रहे।

कौन-कौन से मामले दर्ज हैं?

सोलंकी पर अब तक लगभग 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें आगजनी, जमीन कब्जा, गैंगस्टर एक्ट और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

  • आगजनी केस (2022):
    कानपुर के जाजमऊ इलाके में विधवा नजीर फातिमा के घर में आग लगाने का आरोप। कोर्ट ने इरफान, उनके भाई रिजवान और तीन अन्य को सात साल की सजा सुनाई थी।
  • गैंगस्टर एक्ट:
    यूपी पुलिस ने इरफान और उनके करीबियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।
  • मनी लॉन्ड्रिंग:
    ईडी (Enforcement Directorate) ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की और आरोप लगाया कि उन्होंने फ्रंट कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद किया।
  • फर्जी दस्तावेज और जमीन कब्जा:
    एसआईटी की जांच में सामने आया कि कई जमीन सौदों में उन्होंने अवैध तरीके अपनाए।

कानूनी पेंच

जून 2024 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म हो गई। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ सकते हैं, लेकिन सजा पर स्टे न मिलने के कारण राजनीतिक भविष्य अनिश्चित है।

सपा और राजनीति पर असर

इरफान सोलंकी की पत्नी नसीम सोलंकी सीसामऊ उपचुनाव में सपा उम्मीदवार हैं। पार्टी को उम्मीद है कि इरफान की जमानत से मुस्लिम वोट बैंक मजबूत होगा। दूसरी ओर, भाजपा इसे ‘कानून बनाम गुंडई’ का मुद्दा बनाकर पेश कर रही हैइरफान सोलंकी समाजवादी पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरों में गिने जाते हैं। लेकिन 18 आपराधिक मामलों की वजह से उनका राजनीतिक करियर कानूनी दांव-पेंच में फंसा हुआ है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर होंगी, जहां से उन्हें सजा पर स्टे मिलने की उम्मीद है।

इरफान सोलंकी समाजवादी पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरों में गिने जाते हैं। लेकिन 18 आपराधिक मामलों की वजह से उनका राजनीतिक करियर कानूनी दांव-पेंच में फंसा हुआ है। अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर होंगी, जहां से उन्हें सजा पर स्टे मिलने की उम्मीद है।

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