मध्य पूर्व के लंबे और खूनी संघर्ष को विराम मिल गया है। हमास और इस्राइल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में पहुँचे सीजफायर समझौते के बाद ग़ज़ा पट्टी में जश्न का माहौल है। दो साल से चली आ रही जंग, जिसमें हजारों जानें गईं और लाखों बेघर हुए, अब कम से कम अस्थायी रूप से थम चुकी है।
ग़ज़ा के सड़कों पर लोग नाच-गाने, तालियाँ बजाने और एक-दूसरे को गले लगाने में व्यस्त हैं, जबकि इस्राइल में बंधकों के परिवार आंसुओं से भीगी आँखों में उम्मीद की किरण तलाश रहे हैं। लेकिन सवाल यह है – क्या यह शांति का स्थायी समाधान है, या फिर एक और नाजुक संधि?
समझौते की मुख्य बातें
यह समझौता ट्रंप के 20-सूत्री शांति प्लान का पहला चरण है, जो 9 अक्टूबर को मिस्र के शर्म अल-शेख में अंतिम रूप दिया गया। कतर, मिस्र, अमेरिका और तुर्की की मध्यस्थता में हुए बातचीत के बाद इस्राइल की कैबिनेट ने 10 अक्टूबर को इसे मंजूरी दी। मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
- सीजफायर का प्रभावी होना: 10 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे (स्थानीय समय) से युद्धविराम लागू हो गया। इस्राइली सेना ग़ज़ा के कुछ हिस्सों से पीछे हट रही है, लेकिन पूरी तरह वापसी दूसरे चरण पर निर्भर।
- बंधकों की रिहाई: हमास 20 जीवित बंधकों और मृतकों के शवों को 72 घंटों के अंदर रिहा करेगा। बदले में इस्राइल 250 फलस्तीनी कैदियों (जिनमें उम्रकैद की सजा पा चुके शामिल) और 1,700 ग़ज़ा निवासियों को आजाद करेगा। रिहाई सोमवार (13 अक्टूबर) से शुरू हो चुकी है।
- मानवीय सहायता: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 1,70,000 मीट्रिक टन भोजन, दवा और अन्य सामग्री ग़ज़ा पहुँचने को तैयार हैं। राफा क्रॉसिंग (ग़ज़ा-मिस्र सीमा) दोनों दिशाओं में खुल जाएगा।
- भविष्य के चरण: दूसरा चरण हमास के निरस्त्रीकरण, इस्राइल की पूरी वापसी और ग़ज़ा में नई शासन व्यवस्था पर केंद्रित होगा। लेकिन इन पर अभी सहमति नहीं बनी है।
ट्रंप ने कहा, "यह मजबूत, टिकाऊ और शाश्वत शांति की दिशा में पहला कदम है।" हमास के मुख्य वार्ताकार खलील अल-हय्या ने अमेरिकी गारंटी का हवाला देते हुए कहा, "युद्ध पूरी तरह समाप्त हो गया है।"
ग़ज़ा में जश्न
ग़ज़ा में समझौते की खबर फैलते ही खुशी की लहर दौड़ पड़ी। नुसैरत रिफ्यूजी कैंप, खान यूनिस और ग़ज़ा सिटी की सड़कों पर लोग फलस्तीनी झंडे लहराते, मिठाइयाँ बाँटते और नारे लगाते दिखे। बच्चे सड़कों पर दौड़ते हुए "फलस्तीन जिंदाबाद" चिल्ला रहे थे, जबकि महिलाएँ एक-दूसरे को गले लगाकर रो रही थीं। एक विस्थापित फलस्तीनी, अहमद शहीबर ने कहा, "दो साल की बमबारी के बाद आज पहली बार आसमान साफ लग रहा है। यह खुशी का दिन है, लेकिन दर्द अभी भी ताजा है।"
कैथोलिक समुदाय के सदस्य, जो दो साल से बमबारी के बीच रोजाना मिस्सा अदा करते रहे, चर्चों में गीत गा रहे हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर वायरल वीडियो में ग़ज़ा के निवासी नाचते-गाते दिख रहे हैं, जहाँ हवा में उत्सव की गोलियाँ चल रही हैं। लेकिन कुछ आवाजें सतर्क भी हैं – एक स्थानीय ने एनपीआर से कहा, "खुशी तो है, लेकिन इतना खून बह चुका है कि क्या यह स्थायी होगा?"
इस्राइल में भी तेल अवीव के होस्टेज स्क्वायर पर जश्न हुआ। बंधकों के परिवारों ने ट्रंप को नोबेल पुरस्कार देने की माँग की। एक माँ ने कहा, "ये वे आंसू हैं जिनकी हम प्रार्थना करते रहे।"
दो साल का खूनी संघर्ष
यह जंग 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से शुरू हुई, जिसमें 1,200 इस्राइली मारे गए और 250 बंधक बनाए गए। इस्राइल की जवाबी कार्रवाई में ग़ज़ा में 67,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए, लाखों बेघर हुए और इलाका तबाह हो गया। दो पहले के सीजफायर (जनवरी 2025 सहित) टूट चुके हैं, जिससे संदेह की परतें जुड़ गई हैं। हमास ने कहा है कि यह "फलस्तीन की जीत" है, जबकि इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि "हमास का शासन समाप्त होना चाहिए।"
शांति या नया संकट?
हालांकि जश्न हो रहा है, लेकिन कई मुद्दे अनसुलझे हैं। हमास ने ग़ज़ा में "सुरक्षा मजबूत करने" के नाम पर प्रतिद्वंद्वी गुटों और कथित सहयोगियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे चरण में हमास का निरस्त्रीकरण और ग़ज़ा का पुनर्निर्माण सबसे बड़ी बाधा बनेगा। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा, "हम सहायता बढ़ाने और पुनर्वास के लिए तैयार हैं।
ट्रंप मिस्र जाकर समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, जो क्षेत्रीय शांति की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। लेकिन जैसा कि एक फलस्तीनी कार्यकर्ता ने कहा, "यह युद्ध का अंत नहीं, बल्कि एक विराम है। जड़ें अभी भी गहरी हैं। यह समझौता मध्य पूर्व की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है, लेकिन सफलता अंतरराष्ट्रीय दबाव और दोनों पक्षों की इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी।



