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जनरेशनल शिफ्ट..बोल्ड स्टेप...बोल्ड एक्सपेरीमेंट, पर क्या भाजपा के अंदर यह दिखेगा

जनरेशनल शिफ्ट..बोल्ड स्टेप...बोल्ड एक्सपेरीमेंट, पर क्या भाजपा के अंदर यह दिखेगा

न्यूज प्लस डेस्क, नई दिल्ली। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन शायद कुछ दिनों बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। कहा जा रहा है यह जनरेशनल शिफ्ट है...भाजपा का बोल्ड स्टेप और बोल्ड एक्सपेरीमेंट है। नबीन की ताजपोशी को भाजपा के नवीन प्रयोग के तौर पर भी देखा जा रहा है, लेकिन जब नितिन के सामने मोदी, शाह जैसे नेता बैठे होंगे तो क्या वह कोई अपना फैसला ले पाएंगे। क्या पार्टी के अंदर भी यह बदलाव देखने को मिलेगा जहां संगठन में भी कई वरिष्ठ और दिग्गज नेता बैठे हैं।

जैसे कांग्रेस को लेकर सवाल उठते हैं, अध्यक्ष कोई भी हो-फैसले राहुल और सोनिया ही लेते हैं। प्रधानमंत्री भले मनमोहन सिंह रहे हों लेकिन फाइलें सोनिया गांधी ही देखती थीं। इसी तरह भाजपा में भी कहा जाता रहा है अध्यक्ष भले जेपी नड्डा हैं लेकिन फैसले तो मोदी-अमित शाह ही लेते हैं। नितिन नबीन को सरल, मिलनसार, सभ्य और जमीन का नेता बताकर भाजपा संदेश दे रही है कि अब तक का यह सबसे युवा नेतृत्व है। 45 साल की पार्टी की कमान 45 साल के नितिन नबीन को दी गई है, लेकिन पहली बार राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने वाले नितिन क्या वास्तव में अपने दम पर अपने मन के फैसले कर पाएंगे।

 आज अमित शाह, जेपी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान समेत तमाम विरष्ठ नेताओं और दिल् की पूरी सरकार ने न केवल उनके स्वागत के लिए पार्टी कार्यालय में उनका इंतजार किया बल्कि खुद कुर्सी तक ले जाकर बैठाया। पार्टी कार्यकर्ताओं को तो यही संदेश देने की कोशिश की कि सबको नितिन नबीन का समर्थन है लेकिन क्या पार्टी अध्यक्ष रहते हुए उनको अपने फैसले करने की स्वतंत्रता रहेगी।  भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष अभी तक अगड़ा ही रहा है, लेकिन इस बार ब्राह्मण और राजपूतों के बीच तलवारें खिंचने का खतरा था। ऐसे में पार्टी को ऐसा अगड़ा देना था जिसको लेकर कोई विवाद न हो इसलिए शायद कायस्थ समाज का अध्यक्ष चुना गया। जहां तक उनके फैसलों की बात है उनके कुर्सी पर बैठते ही संजय सरावगी को उन्हीं के प्रदेश बिहार का नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित कर दिया गया, जाहिर उनकी इसमें कोई भूमिका नहीं रही। यह भी हो सकता था प्रदेश अध्यक्ष एक-दो दिन बाद घोषित होता और उनकी भी राय ली जाती, इससे सवाल उठ रहे हैं कि वह अपने स्तर क्या फैसले ले पाएंगे या केवल रबर स्पम्प ही बनकर रह जाएंगे।

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