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गांधी जी की सोच: क्या आज कमज़ोर पड़ी है या और भी मज़बूत?

गांधी जी की सोच: क्या आज कमज़ोर पड़ी है या और भी मज़बूत?

गांधी जी की सोच: महात्मा गांधी केवल भारत के राष्ट्रपिता ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति और अहिंसा के सबसे बड़े प्रतीक हैं। उनका पूरा जीवन एक प्रयोगशाला था, जिसमें उन्होंने सत्य, अहिंसा और नैतिक बल को परखा। आज़ादी के 75 साल बाद सवाल उठता है—क्या गांधी जी की सोच आज कमज़ोर पड़ चुकी है, या वह और भी प्रासंगिक हो गई है?

आज के भारत और विश्व में गांधी का विचार

आज की राजनीति और समाज में हिंसा, असहिष्णुता और सत्ता की होड़ दिखाई देती है। ऐसे में गांधी जी का "अहिंसा ही सबसे बड़ी ताकत है" वाला संदेश कहीं खोता हुआ लगता है। भीड़ हिंसा, सांप्रदायिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय युद्ध—ये सब बताते हैं कि गांधी जी के सिद्धांतों को गंभीरता से अपनाने की ज़रूरत है। लेकिन दूसरी ओर, क्लाइमेट चेंज और सामाजिक न्याय जैसे वैश्विक मुद्दों पर गांधी की सोच और भी मज़बूत होकर सामने आती है। उनका "सादा जीवन, उच्च विचार" आज सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरण संतुलन का मार्गदर्शन करता है।

गांधी की वैश्विक स्वीकृति

गांधी की सोच केवल भारत तक सीमित नहीं रही। मार्टिन लूथर किंग जूनियर, नेल्सन मंडेला और बराक ओबामा जैसे नेताओं ने सार्वजनिक रूप से माना कि उनकी प्रेरणा गांधी से मिली। संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को "International Day of Non-Violence" घोषित किया, जो गांधी जी की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। आज भी दुनिया में शांति आंदोलनों और नागरिक अधिकारों की लड़ाई में गांधी का नाम लिया जाता है।

गांधी के जीवन और आदर्शों पर प्रमुख पुस्तकें

  1. "The Story of My Experiments with Truth" – महात्मा गांधी की आत्मकथा।
  2. "Gandhi Before India" – रामचंद्र गुहा द्वारा।
  3. "Great Soul: Mahatma Gandhi and His Struggle with India" – जोसेफ लेलीवेल्ड द्वारा।
  4. "Gandhi: The Years That Changed the World (1914-1948)" – रामचंद्र गुहा द्वारा।
  5. "Gandhi: An Autobiography – The Story of My Experiments with Truth" (अंग्रेजी संस्करण)

गांधी जी का व्यक्तित्व भले ही इतिहास का हिस्सा बन गया हो, लेकिन उनके विचार आज भी जीवंत हैं। परिस्थितियाँ बदलती हैं, चुनौतियाँ नई होती हैं, पर सत्य, अहिंसा और न्याय जैसे मूल्य कभी पुराने नहीं पड़ते। गांधी जी ने स्वयं कहा था—
"आप मुझे मार सकते हैं, लेकिन मेरे विचारों को नहीं मार सकते।"

आज यह साफ है कि आदमी चला जाता है, लेकिन विचार इतिहास और आने वाली पीढ़ियों में जीवित रहते हैं। गांधी जी का जीवन इसी बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।


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