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फोक म्यूज़िक 2.0: डिजिटल दौर में हरियाणवी, पंजाबी और भोजपुरी गीतों का जलवा

फोक म्यूज़िक 2.0: डिजिटल दौर में हरियाणवी, पंजाबी और भोजपुरी गीतों का जलवा

लोकसंगीत यानी फोक म्यूज़िक, जो कभी गाँव की चौपालों, मेलों और पारंपरिक आयोजनों तक सीमित था, अब डिजिटल दुनिया की लहरों पर सवार होकर वैश्विक मंच तक पहुँच चुका है। विशेषकर हरियाणवी, पंजाबी और भोजपुरी संगीत, जो वर्षों तक क्षेत्रीयता की दीवारों में कैद था, अब सोशल मीडिया की बदौलत न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हो रहा है।

यूट्यूब, इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो ऐप्स ने नए कलाकारों को वह मंच दिया है जिसकी पहले कल्पना भी कठिन थी। आज कोई भी युवा अपने स्मार्टफोन से रिकॉर्ड किया गया गाना अपलोड कर सकता है और रातों-रात लाखों दिलों तक पहुँच सकता है। यही वजह है कि "हरियाणवी डांस सॉन्ग", "भोजपुरी हिट्स" और "पंजाबी बीट्स" जैसे शब्द ट्रेंडिंग की सूची में अक्सर देखे जाते हैं।

हरियाणवी संगीत, जो पहले सिर्फ हरियाणा तक सीमित था, आज पूरे उत्तर भारत में सुना जा रहा है। देसी बोली, धमाकेदार बीट्स और पारंपरिक रागों का मिश्रण युवाओं को अपनी ओर खींच रहा है। सपना चौधरी जैसे नाम अब घर-घर में जाने जाते हैं, और यह सब संभव हो पाया सोशल मीडिया की पहुँच के कारण।

भोजपुरी संगीत की कहानी भी कुछ अलग नहीं है। पहले जहाँ इसे केवल ‘मास एंटरटेनमेंट’ तक सीमित माना जाता था, अब इसके कलाकारों की लोकप्रियता बॉलीवुड सितारों से टक्कर ले रही है। खेसारी लाल यादव, पवन सिंह और अक्षरा सिंह जैसे नाम सिर्फ भोजपुरी भाषी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहे। इनके वीडियो करोड़ों व्यूज़ बटोरते हैं और ट्रेंडिंग में बने रहते हैं।

पंजाबी संगीत पहले से ही एक ग्लोबल पहचान बना चुका था, लेकिन अब नए कलाकार जैसे कारन औजला, सिद्धू मूसे वाला (स्व.) और शैरी मान ने सोशल मीडिया के जरिए इसे और नई ऊँचाइयाँ दीं। खासकर पंजाबी बीट्स और हिप-हॉप का मेल अब युवाओं की पहली पसंद बन चुका है।

टॉप भोजपुरी गाने:

  • "लॉलीपॉप लागेलू" (पवन सिंह)
  • "ठीक है" (खेसारी लाल यादव)
  • "रात दीया बुटाई के" (अरविंद अकेला कल्लू)

टॉप हरियाणवी गाने

  • "गाजनी" (अजय हूडा)
  • "फौजी की बेटी" (सुनिता बेबी)
  • "सॉलिड बॉडी" (सपना चौधरी पर फिल्माया गया)

टॉप पंजाबी गाने:

  • "सोहनी" (गुरदास मान)
  • "295" (सिद्धू मूसे वाला)
  • "Don't Look" (कारन औजला)

इस परिवर्तन की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इन तीनों भाषाई क्षेत्रों से उभर रहे नए कलाकार अब किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस या स्टूडियो पर निर्भर नहीं हैं। उनकी आवाज़, उनकी बोली और उनकी ज़मीन की खुशबू सीधे डिजिटल दुनिया में अपना रास्ता बना रही है। एक गाँव का युवक, बिना किसी पारंपरिक प्रशिक्षण के, आज सोशल मीडिया के ज़रिए लाखों लोगों का चहेता बन सकता है।

हालाँकि यह परिवर्तन उत्साहजनक है, लेकिन इसके साथ-साथ कुछ चिंताएँ भी हैं। कंटेंट की गुणवत्ता, अश्लीलता की बढ़ती प्रवृत्ति और तेजी से बदलते ट्रेंड्स के दबाव में परंपरागत लोकसंगीत की आत्मा कहीं पीछे न छूट जाए, इस पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

फिर भी, यह निस्संदेह कहा जा सकता है कि सोशल मीडिया ने फोक म्यूज़िक को एक नया जीवन दिया है। यह न केवल सांस्कृतिक विविधता को सामने ला रहा है, बल्कि भारत की भाषायी और सांगीतिक धरोहर को भी सशक्त कर रहा है।

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