logo

header-ad
header-ad
बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज: जेडीयू की पहली लिस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल

बिहार में चुनावी सरगर्मी तेज: जेडीयू की पहली लिस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल

बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। नामांकन की अंतिम तिथि नजदीक आते ही एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चरम पर पहुंच गई है। इसी बीच, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जनता दल (यूनाइटेड) ने बुधवार को अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी। इस सूची में कुल 57 नाम शामिल हैं, जिनमें सुपौल जिले की सोनबरसा सीट से कैबिनेट मंत्री रत्नेश सदा का टिकट मिलना सबसे चर्चित रहा। जेडीयू ने चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को आवंटित पांच सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारकर गठबंधन के अंदर खलबली मचा दी है।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब एनडीए के सहयोगी दलों के बीच सीटों के आवंटन पर असहमति उफान पर है। जेडीयू को कुल 101 सीटें मिलने की बात कही जा रही है, लेकिन पार्टी ने अपनी पहली सूची में विवादास्पद सीटों पर दावे ठोंक दिए हैं। जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमारी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध। अफवाहें फैलाने वालों का कोई असर नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कल से चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे।"

प्रमुख उम्मीदवारों की सूची

जेडीयू की इस सूची में अनुभवी नेताओं के साथ-साथ कुछ नए चेहरों को भी जगह दी गई है। पार्टी ने बिहार के विभिन्न क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार चुने हैं।

सीट का नामउम्मीदवार का नामविशेष टिप्पणी
सोनबरसारत्नेश सदाकैबिनेट मंत्री, 2020 में जीत चुके
मोरवाविद्या सागर निषादपिछली बार हार, अब दोबारा दावा
एकमाधूमल सिंहएलजेपीपी को आवंटित सीट पर दावा
राजगीरकौशल किशोरकैबिनेट मंत्री, मजबूत पकड़
मोकामाअनंत सिंहविवादास्पद नेता, पत्नी की सीट पर दावा
फुलवारीश्याम राजकपूर्व मंत्री, दलित वोट बैंक मजबूत
कल्याणपुरमहेश्वर हजारीकैबिनेट मंत्री
गैघाटकोमल सिंहएलजेपीपी विवादित सीट
आलमनगरनरेंद्र नारायण यादवनया चेहरा
बिहारगंजनिरंजन कुमार मेहतास्थानीय प्रभावशाली
सिंधेश्वररमेश रिषिदेवएससी आरक्षित सीट
मधेपुराकविता साहामहिला उम्मीदवार
मीनापुरअजय कुशवाहानया दांव

यह सूची जेडीयू के कुल 101 निर्धारित सीटों में से पहली किस्त है। बाकी नामों की घोषणा अगले कुछ दिनों में होने की संभावना है। सूची में अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व पर विशेष जोर दिया गया है, जो बिहार की सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक लगता है।

चिराग पासवान की सीटों पर जेडीयू का कब्जा

सबसे बड़ा विवाद चिराग पासवान की एलजेपी (आरवी) को मिली सीटों पर पैदा हो गया है। गठबंधन समझौते के तहत सोनबरसा, मोरवा, एकमा, राजगीर और गैघाट जैसी पांच सीटें एलजेपी को आवंटित की गई थीं। लेकिन जेडीयू ने इन सभी पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए। सोनबरसा से रत्नेश सदा का नामांकन इसकी मिसाल है। सदा ने 2020 में कांग्रेस की तारिणी रिषिदेव को 13,466 वोटों से हराया था, और अब एलजेपी के दावे के बावजूद वे मैदान में हैं।

सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार इन सीटों पर असंतोष जता रहे थे, क्योंकि ये जेडीयू के पारंपरिक गढ़ हैं। चिराग पासवान ने भी बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। एनडीए के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "सीट बंटवारा तो तय हो गया, लेकिन विशिष्ट सीटों पर सहमति नहीं बनी। जेडीयू का यह कदम गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है।"

बीजेपी ने मंगलवार को अपनी पहली सूची में 71 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे, जिसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा शामिल हैं। गठबंधन में बीजेपी और जेडीयू को 101-101 सीटें, एलजेपी को 29, राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 6 और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को 6 सीटें मिली हैं। फिर भी, अंतिम फॉर्मूला पर पेंच कसा हुआ है।

महागठबंधन का मजबूत रुख

महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने जेडीयू की सूची पर तंज कसते हुए कहा, "एनडीए का एकजुट दिखावा अब टूट गया। नीतीश जी के फैसले बिहार की जनता को भ्रमित कर रहे हैं। हमारी पार्टी आरजेडी जल्द अपनी सूची जारी करेगी।" आरजेडी ने रघोपुर से तेजस्वी का नामांकन तय किया है, जो उनकी पारंपरिक सीट है।

चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव को दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को कराने का ऐलान किया है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। पहले चरण के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर है। राज्य में कुल 7.24 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 65 लाख नए वोटर जुड़े हैं।

क्या होगा असर?

जेडीयू का यह दांव एनडीए की एकता पर सवाल खड़े करता है। अगर सीट विवाद सुलझा नहीं, तो गठबंधन उम्मीदवारों के बीच 'फ्रेंडली फाइट' हो सकती है, जो विपक्ष को फायदा पहुंचाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जेडीयू का यह कदम नीतीश कुमार की मजबूत पकड़ का प्रतीक है, लेकिन चिराग पासवान जैसे सहयोगियों को नाराज कर सकता है। बिहार की सियासत में अब हर कदम पर नजरें टिकी हैं।

Leave Your Comment