लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश में बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेरफेर और 'वोट चोरी' हो रही है, विशेष रूप से कांग्रेस के मजबूत क्षेत्रों में। उन्होंने कर्नाटक के आलंद और महाराष्ट्र के राजुरा विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि हजारों वोटों को अवैध रूप से हटाया या जोड़ा गया। हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें "गलत और बेबुनियाद" करार दिया।
क्या है राहुल गांधी के आरोप?
वोटर लिस्ट में हेरफेर: राहुल ने दावा किया कि कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6,018 वोटों को हटाने की कोशिश की गई, और यह संख्या इससे भी अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मजबूत बूथों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया।
चुनाव आयोग पर सवाल: राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर वोट चोरों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सीआईडी ने 18 महीनों में 18 पत्र भेजे, लेकिन आयोग ने महत्वपूर्ण जानकारी, जैसे आईपी एड्रेस और ओटीपी ट्रेल, साझा नहीं की।
'हाइड्रोजन बम' का दावा: राहुल ने कहा कि उनके पास वोट चोरी के पुख्ता सबूत हैं और वे जल्द ही इसे "हाइड्रोजन बम" के रूप में जनता के सामने लाएंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें चुनाव आयोग के अंदर से मदद मिल रही है।
लोकतंत्र पर खतरा: राहुल ने कहा कि यह प्रक्रिया पिछले 10-15 वर्षों से चल रही है और यह भारतीय लोकतंत्र को "हाईजैक" करने की साजिश है। उन्होंने विशेष रूप से दलित और ओबीसी समुदायों के वोटों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग को अल्टीमेटम: राहुल ने मांग की कि आयोग एक सप्ताह के भीतर कर्नाटक सीआईडी को जवाब दे, अन्यथा यह माना जाएगा कि ज्ञानेश कुमार वोट चोरों की मदद कर रहे हैं। राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक व्यक्ति, सूर्यकांत, को भी बुलाया, जिन्होंने दावा किया कि उनके नाम से 12 लोगों के वोट डिलीट किए गए।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों का त्वरित जवाब देते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया। आयोग ने कहा कि राहुल गांधी के आरोप "गलत और निराधार" हैं। कोई भी आम नागरिक ऑनलाइन वोट डिलीट नहीं कर सकता, जैसा कि राहुल ने दावा किया।
आयोग ने बताया कि वोटर लिस्ट से किसी भी वोट को हटाने से पहले प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। यह प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार होती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में हेरफेर के लिए ऑनलाइन सिस्टम का दुरुपयोग संभव नहीं है, क्योंकि यह एक सुरक्षित और नियंत्रित प्रक्रिया है। आयोग ने राहुल गांधी के दावों को "गलत सूचना" करार देते हुए कहा कि उनकी ओर से प्रस्तुत तथ्य त्रुटिपूर्ण हैं।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने भी राहुल गांधी के आरोपों पर तीखा पलटवार किया। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी की "हताशा और निराशा" उनके बयानों में साफ झलकती है। ठाकुर ने दावा किया कि कांग्रेस ने ही अतीत में, विशेष रूप से इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के युग में, चुनाव आयोग का दुरुपयोग किया था। उन्होंने राहुल पर "लोकतंत्र को खत्म करने" की कोशिश का आरोप लगाया और कहा कि उनके दावे बिना सबूत के हैं।
पूर्व सीईसी का बयान
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त शहाबुद्दीन कुरैशी ने राहुल गांधी के आरोपों के संदर्भ में चुनाव आयोग को सलाह दी कि वह "असभ्य भाषा" में जवाब देने के बजाय आरोपों की जांच करे। कुरैशी ने कहा कि आयोग को पारदर्शिता के साथ इन दावों का जवाब देना चाहिए।
मामला क्यों चर्चा में है?
राहुल गांधी के आरोप और चुनाव आयोग का जवाब भारतीय राजनीति में एक नए विवाद को जन्म दे रहा है। यह मुद्दा 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद से ही गरमाया हुआ है, जब विपक्ष ने कई राज्यों में मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगाए थे। राहुल के "हाइड्रोजन बम" वाले बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है।



