logo

header-ad
header-ad
डोनाल्ड ट्रंप ने दी भारत को नई धमकी, कहा- 24 घंटे के भीतर ज्यादा टैरिफ लगाएंगे

डोनाल्ड ट्रंप ने दी भारत को नई धमकी, कहा- 24 घंटे के भीतर ज्यादा टैरिफ लगाएंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वह अगले 24 घंटों में भारत पर भारी टैरिफ लगाएंगे। ट्रम्प ने भारत को "अच्छा बिजनेस पार्टनर नहीं" करार देते हुए यह धमकी दी है। यह बयान 'सीएनबीसी स्क्वॉक बॉक्स' को दिए एक साक्षात्कार में आया, जिसमें ट्रम्प ने भारत के उच्च टैरिफ और रूस से तेल खरीदने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

ट्रम्प ने कहा, "भारत के बारे में लोग जो कहना पसंद नहीं करते, वह यह है कि वह सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश है। उसका शुल्क किसी भी देश से ज्यादा है। हम भारत के साथ बहुत कम व्यापार करते हैं क्योंकि उसके शुल्क बहुत ज्यादा हैं। भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा है। वह हमारे साथ काफी व्यापार करता है, लेकिन हम उसके साथ व्यापार नहीं करते। इसलिए हमने 25 प्रतिशत शुल्क पर समझौता किया, लेकिन मुझे लगता है कि मैं अगले 24 घंटों में इसे काफी बढ़ा दूंगा, क्योंकि वे रूस से तेल खरीद रहे हैं। ट्रम्प ने भारत और रूस के बीच ऊर्जा और सैन्य संबंधों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत रूस का सबसे बड़ा ऊर्जा खरीदार और हथियारों का प्रमुख ग्राहक है, जिसे वह अमेरिका के हितों के खिलाफ मानते हैं।

भारत पर पहले से लागू है 25% टैरिफ

ट्रम्प ने 30 जुलाई 2025 को भारत से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 अगस्त से लागू हो चुका है। इसके साथ ही, रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया था। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए भारत को "टैरिफ किंग" और "सबसे जिद्दी ट्रेड पार्टनर" कहा था।उन्होंने लिखा, "याद रखें, भारत हमारा मित्र है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हमने उनके साथ कम व्यापार किया है क्योंकि उनके टैरिफ बहुत ज्यादा हैं,

भारत का पलटवार

भारत सरकार ने ट्रम्प के इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि भारत इस मामले में सतर्क रुख अपना रहा है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में संसद में कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के प्रभावों का आकलन किया जा रहा है और राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

गोयल ने कहा, "मोदी सरकार किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, निर्यातकों, एमएसएमई, और उद्योग जगत के सभी हितधारकों की रक्षा और संवर्धन को सर्वोच्च महत्व देती है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत समय सीमा के आधार पर कोई व्यापार समझौता नहीं करता और वह अमेरिका के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते को तभी स्वीकार करेगा जब वह राष्ट्रीय हित में होगा।

भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध

2024 में अमेरिका ने भारत से 87.4 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि भारत ने अमेरिका से केवल 41.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा। इस व्यापार असंतुलन के कारण अमेरिका को 45.7 अरब डॉलर का व्यापार घाटा झेलना पड़ा। भारत से अमेरिका के प्रमुख आयात में दवाइयां, मोबाइल और संचार उपकरण, और कपड़े शामिल हैं। ट्रम्प ने बार-बार भारत के उच्च टैरिफ की आलोचना की है, खासकर प्रीमियम बाइक हार्ले डेविडसन पर भारत में लगने वाले 150 प्रतिशत आयात शुल्क की।

भारत और रूस के संबंध

ट्रम्प की नाराजगी का एक प्रमुख कारण भारत का रूस के साथ बढ़ता व्यापार है। 2023 में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था, जो भारत के कुल तेल आयात का 39 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। भारत ने रूस से सस्ते दामों पर तेल खरीदना शुरू किया, खासकर तब जब 2022 में अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर प्रतिबंध लगाए थे।

ट्रम्प ने भारत को रूस के साथ व्यापार बंद करने का दबाव डाला है, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस सहित 40 देशों से तेल आयात करता है और यह नीति आगे भी जारी रहेगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील की स्थिति

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत लंबे समय से चल रही है। भारतीय अधिकारियों ने संकेत दिया है कि 24 अगस्त 2025 को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा कर सकता है ताकि इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।

हालांकि, ट्रम्प के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि वह भारत पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहे हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका को भारत के साथ बातचीत के लिए और समय चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि भारत अपने बाजार को अमेरिकी निर्यात के लिए और कितना खोलने को तैयार है।

भारत के लिए प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि 25 प्रतिशत टैरिफ और अतिरिक्त जुर्माने से भारत के निर्यात, खासकर दवाइयां, आईटी, और टेक्सटाइल सेक्टर, पर अल्पकालिक असर पड़ सकता है। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह भारत के लिए अवसर भी हो सकता है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के महासचिव रंजीत मेहता ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव के इस दौर में भारत अपने निर्यात का विस्तार कर सकता है।उन्होंने कहा, "अमेरिका का टैरिफ केवल सामान पर लागू है, सर्विसेज पर नहीं। भारत का आईटी सेक्टर अभी भी सुरक्षित है।

Leave Your Comment