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अलविदा धर्मेंद्र…बॉलीवुड के ही-मैन नहीं रहे

अलविदा धर्मेंद्र…बॉलीवुड के ही-मैन नहीं रहे

न्यूजप्लस । अजीत सिंह
बॉलीवुड के ही-मैन, लाखों दिलों की धड़कन, खूबसूरत मुस्कान और ज़मीन से जुड़े स्वभाव वाले धर्मेंद्र अब हमारे बीच नहीं रहे। सोमवार की सुबह उन्होंने मुंबई के अपने जुहू वाले घर में अंतिम सांस ली। 89 साल की उम्र, एक लंबी बीमार ज़िंदगी, और फिर ये कड़वी सच्चाई। हिंदी सिनेमा का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए बुझ गया। विले पार्ले श्मशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में उनके परिवार समेत एक्टर अमिताभ बच्चन, सलमान खान, आमिर खान और अक्ष्य कुमार जैसे तमाम अभिनेता इस दौरान मौजूद रहे। देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपना दुख जताया।


पूरे देश ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया, उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री में, उनके परिवार में और हर उस इंसान के दिल में खालीपन है जिसने कभी भी धर्मेंद्र की कोई फिल्म देखी हो। आज हम बात करेंगे, धर्मेंद्र की ज़िंदगी, उनकी बीमारी, उनके आखिरी पल, उनका परिवार, उनकी फिल्मों की यादें और उस दर्द की, जो हर कोई महसूस कर रहा है।
धर्मेंद्र का जन्म पंजाब के एक छोटे से गांव साहनेवाल में हुआ था। उनके पिता स्कूल में हेडमास्टर थे और घर में एक साधारण, सीधी-सादी जिंदगी थी। धर्मेंद्र बचपन से ही फिल्मों के दीवाने थे। वो कहते थे , मैं परदे पर हीरो नहीं, परदे पर अपनी किस्मत ढूंढने आया हूं। उन्होंने अपने दम पर, अपनी मेहनत पर, बिना किसी गॉडफादर के, 1960-70 का दौर, बड़े-बड़े सितारों के बीच, अपनी पहचान बनाई। उनकी पहली फिल्म, दिल भी तेरा, हम भी तेरे (1960) पर्दे पर आई और यहीं से उनके सफर की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे करते-करते वो रोमांटिक हीरो बने, फिर एक्शन के बादशाह, और फिर कॉमेडी और इमोशनल रोल्स में भी छा गए। उनकी रोमांटिक फिल्मों ने लोगों को दीवाना बनाया। उनका एक्शन, जिस वजह से उन्हें ही-मैन कहा गया, आज भी लोग याद करते हैं। उनकी कॉमेडी, जैसे चुपके-चुपके, आज भी टीवी पर आती है तो लोग हँसते-हँसते थक जाते हैं। धर्मेंद्र ने 300 से ज़्यादा फिल्में कीं। कुछ फिल्में जिन्होंने उन्हें अमर कर दिया। शोले (वीरू), चुपके-चुपके, धूप छांव, शहीद, मेरा गाँव मेरा देश, फूल और पत्थर, सीता और गीता में धर्मेंद्र सिर्फ एक्टिंग ही नहीं करते थे, वे अपनी भूमिकाओं को जीते थे। वे उस दौर के सबसे बड़े स्टार थे, पर उनके अंदर कभी भी स्टारडम का घमंड नहीं आया। धर्मेंद्र की जिंदगी में परिवार हमेशा सबसे ऊपर रहा। पहली पत्नी, प्रकाश कौर जिनसे बच्चे, सनी देओल, बॉबी देओल और दो बेटियां थी, फिर उन्होंने शादी की हेमा मालिनी से , फिर इनसे भी दो बेटियां हुई, ईशा देओल, अहाना देओल लेकिन आज उनके अंतिम संस्कार में, हेमा मालिनी हों, सनी-बॉबी हों, ईशा-अहाना हों, अमिताभ बच्चन हों, हर किसी की आँखें नम थीं। बीते एक महीने से धर्मेंद्र की तबीयत नाज़ुक थी। उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, उन्हें 10 नवंबर को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने जुहू वाले घर में रखा, वेंटिलेटर लगाया, कई दवाइयाँ, कई कोशिशें, फिर 12 नवंबर को परिवार की इच्छा पर उन्हें डिस्चार्ज किया गया। परिवार ने कहा- पापा को घर पर रखना है। वे अस्पताल में अकेलापन महसूस करते हैं, जिसके बाद धर्मेंद्र को घर लाया गया। नर्सिंग टीम, दवाइयाँ, इलाज चलता रहा लेकिन उम्र और बीमारी ने अब हार मानली। 24 नवंबर 2025 की सुबह, वो पल आया, जब उनके कमरे से हलचल हुई, और डॉक्टरों ने कहा- वो अब नहीं रहे। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा, जिसके बाद नम आखों से धर्मेंद्र का अंतिम संस्कार विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान भूमि में हुआ। सबसे दर्दनाक दृश्य था, जब सनी देओल ने रोते हुए पिता को मुखाग्नि दी, सनी का कांपता हुआ हाथ, बॉबी देओल बगल में खड़े रोते रहे, अमिताभ बच्चन चुपचाप, सिर झुकाए खड़े रहे, ये दृश्य सिर्फ अंतिम संस्कार का नहीं था, बल्कि बॉलीवुड की सबसे बड़ी विदाई थी। धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म इक्कीस का मोशन पोस्टर, उसी दिन रिलीज हुआ, जिस दिन उनका निधन हुआ। लोगों को लगा था, धर्मेंद्र अब भी फिल्में कर रहे हैं और फिर दोपहर में खबर आ गई कि वो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी फिल्में, उनकी बातें, उनका अंदाज़, हमेशा जिन्दा रहेगा।
न्यूज प्लस की पूरी टीम की तरफ से धर्मेंद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि….

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