अफगानिस्तान के पूर्वी हिस्से में 30 अगस्त 2025 की देर रात आए 6.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने मंगलवार को बताया कि इस आपदा में मृतकों की संख्या 1,400 को पार कर चुकी है, जबकि 3,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
भूकंप का केंद्र नांगरहार प्रांत के जलालाबाद शहर से लगभग 27 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था, और इसकी गहराई मात्र 8-10 किलोमीटर थी, जिसके कारण इसका विनाशकारी प्रभाव और बढ़ गया। कुनार और नांगरहार प्रांतों में कई गांव पूरी तरह तबाह हो गए, और हजारों लोग मलबे में दबे हुए हैं। तालिबान ने इस संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता की अपील की है।
भूकंप रविवार की रात 11:47 बजे (स्थानीय समय) आया, जब अधिकांश लोग अपने घरों में सो रहे थे। कुनार प्रांत के नूरगल जिले में स्थित घाजी अबाद गांव सहित कई गांव पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गए। स्थानीय निवासी अब्दुल्लाह ने बताया, "इस गांव में एक भी कमरा खड़ा नहीं बचा। कुछ ही सेकंड में सब कुछ खत्म हो गया।" मिट्टी और पत्थर से बने घर, जो पहाड़ी ढलानों पर बने थे, इस भूकंप को झेल नहीं पाए। भूकंप की उथली गहराई के कारण इसका प्रभाव और भी घातक रहा। भूस्खलन और बारिश ने बचाव कार्यों को और जटिल बना दिया, क्योंकि कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं।
कुनार प्रांत में कम से कम 610 लोगों की मौत और नांगरहार में 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। तालिबान के प्रवक्ता ने बताया कि 8,000 से अधिक घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। जलालाबाद का मुख्य अस्पताल, जो इस क्षेत्र का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र है, घायलों की संख्या के कारण पूरी तरह अभिभूत है। संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी, इंद्रिका रतवट्टे ने चेतावनी दी कि जैसे-जैसे बचाव कार्य आगे बढ़ेंगे, मृतकों की संख्या में "घातीय वृद्धि" हो सकती है।
तालिबान की अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील
तालिबान सरकार, जो 2021 में सत्ता में आने के बाद से आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना कर रही है, ने इस आपदा से निपटने के लिए वैश्विक समुदाय से मदद मांगी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत ज़मान ने रॉयटर्स को बताया, "हमें मदद की सख्त जरूरत है क्योंकि बहुत से लोगों ने अपनी जान और घर गंवा दिए हैं।" तालिबान ने अपनी सीमित संसाधनों के साथ राहत कार्य शुरू किए हैं, जिसमें 40 हेलीकॉप्टर उड़ानें शामिल हैं, जिनमें 420 घायल और मृतकों को निकाला गया। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि सरकार ने पीड़ितों के लिए 1 अरब अफगानी (लगभग 14 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का फंड आवंटित किया है।
हालांकि, तालिबान की कट्टर नीतियों, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों पर लगाए गए प्रतिबंधों, जैसे कि गैर-सरकारी संगठनों में काम करने पर रोक, के कारण कई देश और दानदाता सहायता प्रदान करने में हिचक रहे हैं। अमेरिका ने इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान के लिए अपनी सहायता में भारी कटौती की थी, जिसके कारण 420 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र बंद हो गए, जिनमें से 80 पूर्वी क्षेत्र में थे।
भारत समेत कई देशों ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ
कई देशों और संगठनों ने इस आपदा के जवाब में सहायता की पेशकश की है। भारत ने 1,000 टेंट और 15 टन खाने का सामान भेजा है, और मंगलवार से और राहत सामग्री भेजने की योजना है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मानवीय सहायता का वादा किया।
ब्रिटेन ने 1.3 मिलियन डॉलर की आपातकालीन सहायता की घोषणा की, लेकिन इसने स्पष्ट किया कि यह सहायता संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस जैसे "अनुभवी साझेदारों" के माध्यम से प्रदान की जाएगी, ताकि यह तालिबान सरकार के हाथों में न जाए। चीन, जापान, ईरानी और यूरोपीय संघ ने भी सहायता की पेशकश की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि उनकी टीमें प्रभावित क्षेत्रों में "आपातकालीन सहायता और जीवन रक्षक समर्थन" प्रदान कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अस्पतालों में सहायता और अतिरिक्त आपूर्ति की तैनाती शुरू कर दी है।
अफगानिस्तान के बुरे हाल
यह भूकंप ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान पहले से ही कई संकटों से जूझ रहा है। 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कमी आई है, जिसके कारण देश की लगभग 85% आबादी 1 डॉलर प्रतिदिन से कम पर जीवित है। इसके अलावा, हाल के महीनों में ईरान और पाकिस्तान से लाखों अफगानों को जबरन निर्वासित किया गया है, जिसने देश की मानवीय स्थिति को और बदतर बना दिया है।
कुनार जैसे रूढ़िवादी क्षेत्रों में सांस्कृतिक मानदंडों के कारण महिलाओं और लड़कियों को चिकित्सा सहायता प्राप्त करने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ परिवार अपनी महिलाओं को दिन के उजाले तक अस्पताल ले जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिसके कारण उपचार में देरी हो रही है।



