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तूफान ‘मोन्था’ का कहर: तेलंगाना में जलप्रलय, स्कूल डूबा, गाड़ियां बह गईं

तूफान ‘मोन्था’ का कहर: तेलंगाना में जलप्रलय, स्कूल डूबा, गाड़ियां बह गईं

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान मोन्था ने आंध्र प्रदेश के तट पर दस्तक देकर पूरे दक्षिण भारत को हिला दिया है। तेलंगाना में इसकी चपेट में आते ही भारी बारिश ने बाढ़ का रूप ले लिया, जिससे नदियां उफान पर आ गईं। मुसी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, जबकि नलगोंडा और खम्मम जिलों में स्कूलों पर पानी की मार पड़ी।

रिपोर्ट के मुताबिक एक गुरुकुलम स्कूल में 500 से अधिक छात्र घिर गए, जिन्हें रस्सियों के सहारे बचाया गया। इसी तरह, खम्मम में एक ट्रक निम्मावागु नाले की उफनती धारा में बह गया, ड्राइवर लापता है। महबूबाबाद के डोरनाकल रेलवे स्टेशन पर पानी भर गया, दो प्रमुख ट्रेनें रुक गईं। राज्य सरकार ने रेड अलर्ट जारी कर राहत कार्य तेज कर दिए हैं, लेकिन बाढ़ से अब तक कोई मौत नहीं हुई।

चक्रवाती तूफान मोन्था का जन्म बंगाल की खाड़ी में 25 अक्टूबर को हुआ था। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह तूफान 28-29 अक्टूबर की दरमियानी रात को आंध्र प्रदेश के नरसापुर के पास तट पर पहुंचा, जहां हवाओं की रफ्तार 90-100 किलोमीटर प्रति घंटा थी। लैंडफॉल के बाद यह कमजोर होकर चक्रवाती तूफान में बदल गया और उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा। तेलंगाना में दाखिल होते ही इसने 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश बरसाई, जिससे पूर्वी तेलंगाना के जिले जलमग्न हो गए। वरंगल जिले में सुबह 4 बजे तक 200 मिमी से ज्यादा वर्षा दर्ज की गई, जबकि हैदराबाद के मूशीराबाद, बेगमपेट और सिकंदराबाद में 40 मिमी बारिश हुई।

तेलंगाना में बाढ़ का सबसे भयानक रूप नलगोंडा जिले में दिखा। यहां कोम्मापल्ली के गुरुकुलम स्कूल को बाढ़ का पानी घेर लिया। स्कूल कैंपस में पानी भर गया, जिससे 500 से अधिक छात्र और स्टाफ फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। जिला कलेक्टर के निर्देश पर एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की टीमें पहुंचीं। रस्सियों और नावों का इस्तेमाल कर छात्रों को सुरक्षित निकाला गया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, "पानी इतना तेज था कि स्कूल की दीवारें हिल रही थीं। बच्चे डर से कांप रहे थे, लेकिन टीमों ने चमत्कारिक ढंग से सबको बचा लिया।" इसी जिले के देवरकोंडा मंडल के कोम्मेपल्ली में आदिवासी कल्याण आवासीय स्कूल में भी छात्र फंस गए। भारी बारिश से नदियां और नाले उफान पर आ गए, जिससे सड़कें और पुल जलमग्न हो गए।

खम्मम जिले में स्थिति और भी गंभीर थी। यहां निम्मावागु नाले पर एक डीसीएम ट्रक तेज धारा में बह गया। चालक अंजाना के पास लापता हो गया, जबकि राहत टीमें सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। वीडियो फुटेज में दिखा कि ट्रक पानी की लहरों में धकेलता चला गया, जबकि आसपास के लोग असहाय खड़े थे। जिला प्रशासन ने बताया कि ट्रक चालक को बचाने के लिए ड्रोन और गोताखोरों की मदद ली जा रही है। इसी तरह, वारंगल के रेड्लावाड़ा, कल्लेदा, उरुस और कपुलकनापर्थी इलाकों में सड़कें डूब गईं। बैट्टाला बाजार, वारंगल चौक, शिवानगर सेक्टर और राशि कुंटा में पानी भर गया, जिससे ट्रैफिक ठप हो गया। पुलिस ने लो-लेवल ब्रिजों पर बैरिकेडिंग कर ट्रैफिक डायवर्ट किया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हमारी कार भी बहने को थी, लेकिन पड़ोसियों ने समय रहते खींच ली। यह तूफान हमारी जिंदगी को तहस-नहस कर रहा है।"

रेल यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। महबूबाबाद के डोरनाकल जंक्शन पर पटरी पर पानी भर गया, जिससे गोलकुंडा एक्सप्रेस और कोनार्क एक्सप्रेस रुक गईं। काजीपेट-विजयवाड़ा रूट पर सेवाएं निलंबित कर दी गईं। साउथ सेंट्रल रेलवे ने 28-29 अक्टूबर के लिए 25 ट्रेनें रद्द कर दीं, जिनमें नांदेड़-विशाखापट्टनम, विशाखापट्टनम-लिंगमपल्ली, विशाखापट्टनम-कडपा और नरसापुर-गुंटूर शामिल हैं। खम्मम में वंदे भारत एक्सप्रेस के 60 यात्री फंस गए, जिन्हें आरटीसी बस से सुरक्षित पहुंचाया गया। रेलवे अधिकारियों ने कहा, "पटरी की मरम्मत तेजी से हो रही है, लेकिन सुरक्षा पहले है।"

सरकार ने त्वरित कदम उठाए। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट कर दिया। मंत्री पोंगुलेति श्रीनिवास रेड्डी ने राजस्व और आपदा टीमों को निर्देश दिए कि निचले इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। खम्मम, वारंगल, महबूबाबाद, यदाद्री भुवनगिरि, सूर्यापेट और महबूबनगर जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए। 16 जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा है, जबकि आदिलाबाद, निर्मल और करीमनगर में ऑरेंज-येलो अलर्ट है। पलैरू जलाशय के 23 गेट खोल दिए गए, जबकि भद्राचलम कोयला खदानों और खम्मम कृषि बाजार का संचालन रोक दिया गया। कंट्रोल रूम नंबर जारी किए गए: नलगोंडा (1800-425-1442), सूर्यापेट (62814-92368)।

आंध्र प्रदेश में तूफान का असर ज्यादा भयावह रहा, जहां दो मौतें हो चुकी हैं। राजोलू द्वीप के गांवों में समुद्री पानी घुस गया, 76,000 लोगों को रिलीफ कैंपों में पहुंचाया गया। ओडिशा में भूस्खलन हुए, लेकिन नुकसान कम रहा। आईएमडी के अनुसार, तूफान अगले 24 घंटों में और कमजोर होगा, लेकिन तेलंगाना में हल्की-मध्यम बारिश जारी रहेगी।

तेलंगाना सरकार ने केंद्र से सहायता मांगी है, जबकि एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें रवाना हो चुकी हैं। बाढ़ प्रभावितों के लिए भोजन, दवा और आश्रय की व्यवस्था की जा रही है। यह तूफान एक बार फिर याद दिलाता है कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी जरूरी है। राज्य के लोग अब सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन नुकसान का आकलन अभी बाकी है।

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