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‘डरपोक मोदी… मर्द इंदिरा से कमजोर?’ राहुल के शब्दों ने बढ़ाई गर्मी, BJP में हलचल!

‘डरपोक मोदी… मर्द इंदिरा से कमजोर?’ राहुल के शब्दों ने बढ़ाई गर्मी, BJP में हलचल!

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है। नालंदा जिले के नूरसराय में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने मोदी को 'डरपोक' करार दिया और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तुलना में उनकी हिम्मत को कमतर ठहराया। उनका बयान न केवल राजनीतिक बहस को गरमा देगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर भी नई चर्चा छेड़ देगा। राहुल ने कहा, "मोदी डरपोक हैं। इस मर्द से ज्यादा दम इंदिरा में था। हमारा प्रधानमंत्री ट्रंप के एक फोन पर ऑपरेशन सिंदूर रोक देता है।"

यह बयान बिहार चुनावी माहौल में आग में घी डालने जैसा है। बिहार में महागठबंधन और एनडीए के बीच कांटे की टक्कर चल रही है, और राहुल का यह प्रहार विपक्ष की रणनीति का हिस्सा लगता है। जनसभा में हजारों की संख्या में उपस्थित कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच राहुल ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा, "इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश को आजाद कराया, पाकिस्तान को चूर-चूर किया। लेकिन आज का प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति के एक कॉल पर सैन्य कार्रवाई रोक देता है। यह कमजोरी नहीं तो क्या है?"

राहुल का इशारा 'ऑपरेशन सिंदूर' की ओर था, जो 2024 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर हुए एक कथित सैन्य अभियान का कोड नेम बताया जाता है। सूत्रों के अनुसार, यह ऑपरेशन पुलवामा हमले के बाद की सर्जिकल स्ट्राइक का विस्तार था, जिसमें भारतीय सेना ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसपैठ की योजना बनाई थी। लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। राहुल ने दावा किया कि यह घटना मोदी सरकार की विदेश नीति की पोल खोलती है, जहां राष्ट्रीय हित अमेरिकी दबाव के आगे झुक जाते हैं।

https://twitter.com/INCIndia/status/1983856085829042562

जनसभा का माहौल देखते ही बन था। नूरसराय के मैदान पर कांग्रेस के झंडे लहराते हुए, राहुल के समर्थक 'इंदिरा जिंदाबाद' और 'राहुल जिंदाबाद' के नारों से गूंज रहे थे। राहुल ने अपनी स्पीच में बिहार के मुद्दों को भी जोड़ा। उन्होंने कहा, "बिहार के युवा बेरोजगार घूम रहे हैं, लेकिन मोदी जी का फोकस चीन-पाकिस्तान की सीमा पर नहीं, बल्कि चुनावी रैलियों पर है। इंदिरा ने गरीबी हटाओ का नारा दिया और अमल किया, लेकिन मोदी का 'अच्छे दिन' अब भी इंतजार में है।"

यह बयान राजनीतिक गलियारों में तुरंत प्रतिक्रिया पैदा कर चुका है। भाजपा ने इसे 'अनुचित' और 'राष्ट्रीय सुरक्षा को राजनीतिकरण करने वाला' करार दिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पत्रकारों से कहा, "राहुल गांधी परिवार की परंपरा है कि वे राष्ट्रीय नायकों का अपमान करें। इंदिरा जी को याद करने के बजाय वे अपनी हार मान लें। ऑपरेशन सिंदूर का झूठा प्रचार करके वे वोट नहीं खरीद सकते। मोदी जी ने बालाकोट स्ट्राइक से पाकिस्तान को सबक सिखाया, लेकिन कांग्रेस हमेशा भारत को कमजोर दिखाती है।"

एनडीए के सहयोगी जदयू के नेता ने भी पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट किया, "राहुल बाबू, डरपोक कौन है? जो पाकिस्तान जाकर इमरान खान से गले मिले या जो अमेरिका में जाकर ट्रंप की चाटुकारिता करे?" यह टिप्पणी राहुल के 2019 अमेरिका दौरे का जिक्र कर रही थी। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने राहुल के बयान का समर्थन किया। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा, "राहुल साहब ने सच्चाई बोल दी। मोदी की कथित मजबूत छवि अब चूर हो रही है। बिहार की जनता इंदिरा के वारिस को चुनेंगी।"

https://twitter.com/INCIndia/status/1983855942329377092

इस बयान का राजनीतिक संदर्भ गहरा है। बिहार चुनाव 2025 में महागठबंधन (कांग्रेस-आरजेडी-एसपी) एनडीए (भाजपा-जदयू) को कड़ी चुनौती दे रहा है। राहुल की बिहार यात्रा का यह चौथा चरण है, जहां वे रोजगार, महंगाई और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को घसीटना विपक्ष की नई रणनीति का संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान युवा मतदाताओं को आकर्षित कर सकता है, जो राष्ट्रीय मुद्दों पर संवेदनशील हैं। राजनीतिक विश्लेषक प्रो. राम पुनियानी कहते हैं, "राहुल ने इंदिरा की विरासत को हथियार बनाया है। यह भावनात्मक अपील है, जो भाजपा की 'मजबूत नेता' की छवि को चुनौती देती है। लेकिन अगर ऑपरेशन सिंदूर पर दस्तावेजी सबूत न आए, तो यह उल्टा पड़ सकता है।"

इतिहास में इंदिरा गांधी को 'आयरन लेडी' कहा जाता है। 1971 के युद्ध में उन्होंने पाकिस्तान को पटखनी दी और बांग्लादेश का निर्माण कराया। वहीं, मोदी सरकार पर विपक्ष अक्सर विदेश नीति में 'समझौतावादी' होने का आरोप लगाता है। 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक को मोदी की साहसिक कार्रवाई बताया जाता है, लेकिन राहुल का दावा है कि कई ऐसे ऑपरेशन अमेरिकी दबाव में रुक गए। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी 2023 में संसद में इसी तरह के आरोप लगाए थे।

बिहार में यह बयान जातिगत समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। यादव और मुस्लिम वोट बैंक, जो महागठबंधन का आधार हैं, इंदिरा की याद से प्रेरित हो सकते हैं। वहीं, भाजपा ऊंची जातियों और ईबीसी को लामबंद करने के लिए 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा उठाएगी। चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में पहले चरण का मतदान 5 नवंबर को है, और नूरसराय जैसे इलाके निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

राहुल की इस आक्रामक शैली में बदलाव आया है। पहले वे शांतिपूर्ण छवि के थे, लेकिन अब वे सीधे हमला बोल रहे हैं। उनकी किताब 'हाउ इंडिया सीज इटसेल्फ' में भी वे मोदी की नेतृत्व शैली पर सवाल उठाते हैं। आज की सभा में उन्होंने कांग्रेस का 'न्याय योजना' भी दोहराया, जिसमें बेरोजगारों को 1 लाख रुपये सालाना देने का वादा है।

भाजपा की ओर से अब काउंटर अटैक की उम्मीद है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल पटना में रैली करेंगे, जहां वे राहुल पर 'परिवारवाद' का तंज कस सकते हैं। राजनीतिक पंडितों का अनुमान है कि यह विवाद चुनावी बहस को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाएगा।

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