जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में स्थित हजरतबल दरगाह, जो मुस्लिम समुदाय के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है, हाल ही में एक विवाद का केंद्र बन गई है। दरगाह के नवीनीकरण के बाद लगाई गई एक उद्घाटन पट्टिका पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ की नक्काशी को लेकर स्थानीय लोगों और नेताओं ने आपत्ति जताई। इस विवाद ने धार्मिक भावनाओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच टकराव को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को ईद-ए-मिलाद के अवसर पर गुस्साई भीड़ ने पट्टिका को तोड़ दिया। इस घटना ने जम्मू-कश्मीर में तनाव और राजनीतिक बहस को बढ़ा दिया है।
हजरतबल दरगाह, डल झील के किनारे स्थित, जम्मू-कश्मीर का सबसे पवित्र मुस्लिम तीर्थ स्थल माना जाता है। यहां पैगंबर मोहम्मद के पवित्र अवशेष, जिसे 'मोई-ए-मुकद्दस' (पैगंबर की दाढ़ी का बाल) कहा जाता है, संरक्षित है। इस दरगाह को असर-ए-शरीफ, दरगाह शरीफ, और मदीना-उस-सानी के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण 1968 में शुरू हुआ और 1979 में पूरा हुआ, जिसे शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की देखरेख में मुस्लिम औकाफ ट्रस्ट ने पूरा किया था।
हजरतबल दरगाह का हाल ही में जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड द्वारा जीर्णोद्धार किया गया था। 3 सितंबर 2025 को वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष और बीजेपी नेता डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने नवीनीकृत गर्भगृह और गेस्ट हाउस का उद्घाटन किया। उद्घाटन के दौरान लगाई गई संगमरमर की पट्टिका पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ अंकित था, जिसमें चार शेरों की आकृति शामिल थी। स्थानीय लोगों और कुछ नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई, क्योंकि उनका मानना था कि इस्लामी एकेश्वरवाद (तौहीद) के सिद्धांतों के अनुसार, धार्मिक स्थलों पर जीव-जंतुओं की आकृतियां बनाना निषिद्ध है।
शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को, ईद-ए-मिलाद के अवसर पर, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु दरगाह में नमाज के लिए एकत्र हुए, तो इस पट्टिका को देखकर विवाद भड़क उठा। गुस्साई भीड़ ने संगमरमर की पट्टिका पर अशोक चिह्न को ईंटों और पत्थरों से तोड़ दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसमें लोग राष्ट्रीय प्रतीक को नुकसान पहुंचाते दिखाई दे रहे थे।
वक्फ बोर्ड और बीजेपी की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख्शां अंद्राबी ने इस घटना को "आतंकवादी हमला" करार दिया और इसे राष्ट्रीय प्रतीक का अपमान बताया। उन्होंने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। राष्ट्रीय प्रतीक को क्षतिग्रस्त करना एक बड़ा अपराध है। हमलावर एक राजनीतिक दल के गुंडे हैं, जिन्होंने पहले भी कश्मीर को बर्बाद किया।" अंद्राबी ने दोषियों के खिलाफ जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत कार्रवाई और प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की। उन्होंने यह भी तंज कसते हुए कहा कि यदि राष्ट्रीय प्रतीक से इतनी आपत्ति है, तो क्या लोग दरगाह जाते समय अपनी जेब में नोट (जिन पर अशोक स्तंभ अंकित है) भी नहीं ले जाएंगे।
बीजेपी नेता अशोक कौल ने इस घटना को कश्मीर में 1990 के दशक जैसे हालात बनाने की साजिश बताया और कहा कि कुछ राजनीतिक दल शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) जैसे विपक्षी दलों ने वक्फ बोर्ड पर धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया। एनसी के मुख्य प्रवक्ता और ज़दीबल से विधायक तनवीर सादिक ने कहा, "इस्लाम में बुतपरस्ती की सख्त मनाही है। हजरतबल जैसे पवित्र स्थल पर आकृतियां बनाना तौहीद के सिद्धांतों के खिलाफ है।" उन्होंने वक्फ बोर्ड की कार्रवाई को शर्मनाक बताया।
पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को जानबूझकर उकसाया जा रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना को धार्मिक भावनाओं के खिलाफ बताया और इसे "अहंकार का प्रदर्शन" करार दिया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने दावा किया कि राष्ट्रीय प्रतीक को तोड़ने वालों की पहचान कर ली गई है और वे एक राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि आगे कोई अप्रिय घटना न हो।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, मस्जिद या दरगाह जैसे पवित्र स्थलों पर जीव-जंतुओं की आकृतियां बनाना तौहीद (एकेश्वरवाद) के सिद्धांतों के खिलाफ है। अशोक स्तंभ में चार शेरों की आकृति को कुछ लोगों ने मूर्ति या बुतपरस्ती से जोड़ा, जिसके कारण यह विवाद भड़का। दूसरी ओर, वक्फ बोर्ड और बीजेपी नेताओं का तर्क है कि अशोक स्तंभ एक राष्ट्रीय प्रतीक है, जो देश की एकता और संप्रभुता का प्रतीक है, और इसे धार्मिक संदर्भ से अलग देखा जाना चाहिए।



