चीन ने ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में सीधे हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम से उसे बड़े रणनीतिक फायदे मिले। शी जिनपिंग ने हालात को चुपचाप देखा और बिना हस्तक्षेप किए अवसरों को भुनाया। यही कारण है कि बिना एक भी गोली चलाए चीन कई मोर्चों पर मजबूत होकर उभरा।
सैन्य जानकारी का बड़ा लाभ
इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने अपने आधुनिक हथियारों जैसे JASSM-ER मिसाइल, टॉमहॉक, पैट्रियट और THAAD सिस्टम का इस्तेमाल किया। इससे जहां अमेरिकी हथियारों का स्टॉक कम हुआ, वहीं चीन ने युद्ध की रणनीतियों को करीब से समझा। चीन ने यह भी देखा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन का उपयोग कैसे किया जा रहा है। यह जानकारी भविष्य में ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चीन के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है।
ऊर्जा सेक्टर में मजबूती
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे कई देश रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ने लगे। चीन पहले से ही सोलर, विंड और बैटरी सप्लाई चेन में अग्रणी है और अपनी लगभग 85% ऊर्जा जरूरतें खुद पूरी करता है। इस वजह से संकट के दौरान भी उसकी स्थिति स्थिर रही और उसने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
कूटनीतिक छवि में सुधार
जहां अमेरिका आक्रामक रुख अपनाए रहा, वहीं चीन ने शांत रहकर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की। पाकिस्तान के जरिए बातचीत की पहल ने चीन को एक भरोसेमंद शक्ति के रूप में पेश किया। कई देशों को यह महसूस हुआ कि संकट के समय चीन ज्यादा स्थिर और संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है, जिससे उसकी वैश्विक छवि बेहतर हुई।
AI और टेक्नोलॉजी में बढ़त
मिडिल ईस्ट में चल रहे कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट्स पर इस तनाव का असर पड़ा, जिससे पश्चिमी कंपनियों का निवेश प्रभावित हुआ। इस स्थिति का फायदा चीन को मिला, क्योंकि उसके पास पहले से मजबूत AI इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी AI कंप्यूटिंग क्षमता रखता है और बिना बाहरी सहयोग के भी तेजी से आगे बढ़ सकता है।
रेयर अर्थ मिनरल्स में दबदबा
आधुनिक हथियारों और टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन का नियंत्रण पहले से ही मजबूत है। दुनिया की करीब 70% माइनिंग और 90% प्रोसेसिंग चीन के पास है। अमेरिका द्वारा हथियारों के अधिक इस्तेमाल से उसकी चीन पर निर्भरता और बढ़ गई, जिससे चीन की रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो गई।
फायदे के साथ कुछ खतरे भी
हालांकि चीन को कई फायदे मिले, लेकिन लंबे समय तक संकट रहने पर वैश्विक मांग घट सकती है, जिससे उसके निर्यात पर असर पड़ सकता है। फिर भी इस पूरे घटनाक्रम में चीन सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा, जिसने बिना युद्ध लड़े अपनी ताकत कई गुना बढ़ा ली।
