न्यूज प्लस, राजबीर सिंह। अखिलेश यादव बिहार में चुनाव प्रचार के लिए गए तो वहां कहा, बिहार का चुनाव उप्र के लिए सेमी फाइनल है।...तो अगर बिहार का चुनाव सेमी फाइनल है तो उप्र में अखिलेश यादव को जरूर सोचना होगा।
माना जाता है कि किसी बड़े प्रदेश का चुनाव परिणाम उससे जुड़े प्रदेशों के चुनाव को जरूर प्रभावित करता है और संयोग से बिहार से जुड़े पश्चिम बंगाल और उप्र में अगले दिनों में चुनाव है। कहा जाता है कि बिहार की राजनीतिक खिड़की उप्र में खुलती है, दरअसल उप्र की 8 लोकसभा सीटें और 50 से ऊपर विधानसभा की सीटें बिहार सीमा से जुड़ी हैं। यहां का रिश्ता बिहार से रोटी-बेटी का है, शायद इसीलिए बिहार की राजनीतिक हलचल उप्र को सीधे प्रभावित करती है।
जाहिर है कि बिहार की रिजल्ट देख अखिलेश यादव परेशान जरूर होंगे और उनकी झुंझलाहट भी सोशल मीडिया पर सामने आ गई है। उन्होंने लिखा है कि बिहार में चुनावी साजिश का भंडाफोड़ हो गया है, आगे वह यह खेल नहीं होंने देंगे। उन्होंने आगे लिखा है भाजपा दल नहीं छल है। उनका जवाब उप्र के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने यह लिखकर दिया है कि मगध जीता है अब अवध भी जीतेंगे।
विपक्ष के तौर पर देखा जाय तो लोकसभा चुनाव में भले अखिलेश यादव ने सबसे अच्छा रिजल्ट दिया था, कहा जाए तो भाजपा का विजय रथ अखिलेश यादव ने ही उप्र में रोका था लेकिन बिहार चुनाव का रिजल्ट बहुत कुछ कह रहा है..तो अखिलेश यादव को उप्र में फाइनल मैच की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए और तैयारी भी ऐसी कि बिहार जैसी चूक न हो। बिहार में कांग्रेस की जो हालत हुई है उससे भी सीख लेनी होगी और फिर सोचना होगा कि कांग्रेस को साथ लेकर चलना है या अकेले मैदान में उतरना है।



