न्यूज प्लस, डेस्क। बिहार के रिजल्ट ने राजनीति और राजनेताओं को हिला कर रख दिया है। जंगलराज लालू परिवार के पीछे पड़ गया है और हालात यह अब इस परिवार पर बिहार की जनता का भरोसा कम हो गया है। एमवाई जैसे सेलेक्टिव पॉलिटिकल पैमाने भी हाशिए पर जाने लगे हैं इसलिए बिहार की आवाम आवाज उठा रही है कि विपक्ष की कुर्सी पर कोई नया चेहरा आना चाहिए, जो अपना विजन रखे। जनसुराज के प्रशांत किशोर अगला चेहरा हो सकते हैं बशर्ते कि उनमें पांच साल तक सड़क पर लड़ने का माद्दा हो।
एक हार के बाद बिहार के पॉलिटिकल लालू घराने में घमासान-बगावत हो गई है। लालू धृतराष्ट्र हो गए हैं और वह राबड़ी संग कोपभवन में चले गए हैं। उनके ज्येष्ठ बेटे तेज प्रताप बोल रहे हैं कि बहन का अपमान नहीं सहेंगे। पिता जी इशारा करें तो जयचन्दों की खैर नहीं होगी। बहन रोहिणी आचार्य के दर्द ने सबकुछ बयां कर दिया है। मतगणना के बाद से अब पटना के एक अणे लालू बंगले और 10 सर्कुलर रोड तेजस्वी बंगले में जयचन्दों का दबदबा है। दीवारों तक में कशमकश है। क्या करारी हार के पीछे लालू-तेजस्वी को अतीत में मिली हाय जिम्मेदार है? क्या अब बिहार में नया विपक्ष ढूंढा जाएगा क्योंकि जंगलराज , लालू परिवार का ताजिंदगी पीछा छोड़ने को तैयार नहीं है? ऐसे में साफ है कि बिहार में विपक्ष का नया चेहरा आएगा तो जनता का भरोसा वापस आने की उम्मीद है।



