बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच विपक्षी महागठबंधन ने अपनी चुनावी रणनीति को और मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। कल, 28 अक्टूबर को पटना में शाम 4:30 बजे एक भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महागठबंधन अपना संयुक्त घोषणापत्र (मेनिफेस्टो) जारी करेगा। इस दस्तावेज को 'नया बिहार, नई उम्मीद' के नारे के साथ पेश किया जाएगा, जिसमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर केंद्रित वादे शामिल होंगे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन के इस कदम से चुनावी समर में नया मोड़ आने की उम्मीद है, खासकर जब नतीजे 14 नवंबर को घोषित होने हैं।
महागठबंधन के सूत्रों के अनुसार, घोषणापत्र की तैयारी पिछले कई महीनों से चल रही थी। इसमें बिहार की जनता की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान ढूंढा गया है। सबसे प्रमुख वादा है 'हर घर नौकरी, हर हाथ में काम' की योजना, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 10 लाख सरकारी नौकरियां सृजित की जाएंगी। इसके अलावा, संविदा कर्मचारियों को स्थायी करने, बुजुर्गों को 2,000 रुपये मासिक पेंशन देने और 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा प्रदान करने जैसे कदमों का जिक्र है। तेजस्वी यादव, जो महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं, ने हाल ही में कहा था, "हम 20 महीनों में बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। पलायन रोकना और युवाओं को रोजगार देना हमारी प्राथमिकता होगी।"
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव के अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष खगड़िया प्रसाद शर्मा, आरजेडी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह और वाम दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। हालांकि, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व से राहुल गांधी इस अवसर पर पटना नहीं पहुंच पाएंगे, लेकिन वे 29 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर और दरभंगा में अपनी पहली चुनावी रैलियां करेंगे। जहां राहुल गांधी और तेजस्वी यादव एक मंच पर नजर आएंगे, वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा भी जल्द ही बिहार के चुनावी दौरे पर आ रही हैं। यह संयोजन विपक्षी गठबंधन को मजबूत बनाने का प्रयास है, जो 2015 के चुनावों की याद दिलाता है जब महागठबंधन ने एनडीए को करारी शिकस्त दी थी।
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बिहार चुनाव 2025 की पृष्ठभूमि में यह घोषणापत्र बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में 243 विधानसभा सीटों पर 6 से 11 नवंबर तक चार चरणों में वोटिंग होगी। महागठबंधन ने सीट बंटवारे में आरजेडी को 144 सीटें, कांग्रेस को 70 और वाम दलों को शेष आवंटित की हैं, हालांकि 12 सीटों पर 'फ्रेंडली फाइट' की स्थिति बनी हुई है। गठबंधन का फोकस जाति-आधारित जनगणना, महिला आरक्षण और अल्पसंख्यक कल्याण पर है। घोषणापत्र में 'मां और बेटी' योजना के तहत महिलाओं को मासिक 1,000 रुपये की सहायता, 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर और छात्राओं के लिए मुफ्त शिक्षा का वादा किया गया है। इसके साथ ही, कृषि सुधारों के तहत किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार शामिल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणापत्र महागठबंधन को युवा और महिला मतदाताओं के बीच मजबूत आधार देगा। बिहार में बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत से ऊपर होने और हर साल लाखों युवाओं के पलायन की समस्या से जूझ रहे राज्य में रोजगार का वादा गेम-चेंजर साबित हो सकता है। एक वरिष्ठ राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, "तेजस्वी यादव की छवि एक युवा और ऊर्जावान नेता की है, जो नीतीश कुमार की थक चुकी सरकार के खिलाफ हथियार बन सकती है। लेकिन एनडीए की मजबूत संगठनात्मक क्षमता और केंद्र की योजनाओं का प्रचार इसे चुनौती देगा।"
दूसरी ओर, सत्ताधारी एनडीए ने इसकी आलोचना शुरू कर दी है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने सोमवार को कहा, "महागठबंधन का घोषणापत्र सिर्फ कागजी है। नीतीश कुमार ही बिहार के विकास के असली इंजन हैं और वे ही एनडीए के मुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे।" एनडीए ने भी अपना घोषणापत्र जल्द जारी करने का संकेत दिया है, जिसमें 'विकास पुरुष' नीतीश कुमार के नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और डिजिटल बिहार पर जोर होगा। लोक जनशक्ति पार्टी (रा.से.) के चिराग पासवान और हम (से.) के जीतन राम मांझी जैसे सहयोगी दल दलित और महादलित वोटों को साधने में लगे हैं।
महागठबंधन के अंदरूनी स्रोतों से मिली जानकारी के मुताबिक, घोषणापत्र को तैयार करने में 50 से अधिक विशेषज्ञों की टीम ने योगदान दिया। इसमें बिहार के हर जिले की ग्राउंड रिपोर्ट्स को शामिल किया गया है। एक प्रमुख वादा है 'बिहार फर्स्ट' नीति, जो स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देकर पलायन रोकने का लक्ष्य रखती है। इसके अलावा, स्वास्थ्य क्षेत्र में हर ब्लॉक में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने और शिक्षा में डिजिटल क्लासरूम की व्यवस्था का प्रावधान है।
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यह घोषणापत्र न केवल चुनावी दस्तावेज है, बल्कि महागठबंधन की एकजुटता का प्रतीक भी बनेगा। 2019 के लोकसभा चुनावों में गठबंधन की हार के बाद आरजेडी और कांग्रेस के बीच तनाव की खबरें आई थीं, लेकिन अब दोनों पार्टियां एकजुट दिख रही हैं। राहुल गांधी के बिहार दौरे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है, जबकि तेजस्वी की रैलियां युवाओं को आकर्षित कर रही हैं। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #MahagathbandhanManifesto ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स वादों पर बहस कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में 7.9 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.5 करोड़ नए वोटर शामिल हैं। महागठबंधन का दांव इन्हीं युवाओं पर केंद्रित है। यदि घोषणापत्र के वादे जनता तक सही पहुंचे, तो यह एनडीए के लिए चुनौती बन सकता है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि वादों का क्रियान्वयन ही असली परीक्षा होगा।



