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बिहार में सीएम की कुर्सी पर सस्पेंस, नीतीश के फैसले के बाद बीजेपी की नई चाल तेज

बिहार में सीएम की कुर्सी पर सस्पेंस, नीतीश के फैसले के बाद बीजेपी की नई चाल तेज

नीतीश कुमार ने विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने का फैसला तो कर लिया है, लेकिन मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ा है। उनकी खामोशी ने बिहार की राजनीति में असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर सीएम की कुर्सी पर अगला चेहरा कौन होगा और कब फैसला होगा।

बीजेपी की आत्मनिर्भर रणनीति
भारतीय जनता पार्टी अब बिहार में खुद को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। अब तक पार्टी जेडीयू के सहारे सत्ता में रही, लेकिन पहली बार ऐसा लग रहा है कि बीजेपी खुद मुख्यमंत्री बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है। इसके लिए पार्टी अपने नंबर गेम को मजबूत करने में जुटी है।

कांग्रेस विधायकों पर बीजेपी की नजर
बीजेपी की नजर कांग्रेस के बागी विधायकों पर टिकी है। राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जिससे एनडीए को फायदा मिला। अब अगर ये विधायक बीजेपी के साथ आते हैं तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है। खास बात यह है कि कांग्रेस में अभी तक विधायक दल का नेता और व्हिप तय नहीं हुआ है, जिससे पार्टी कमजोर स्थिति में दिख रही है।

दलबदल कानून से बचने का गणित
अगर कांग्रेस के छह में से चार विधायक अलग होकर बीजेपी में शामिल होते हैं, तो वे दलबदल कानून के दायरे में नहीं आएंगे। इससे उनकी सदस्यता भी बची रहेगी और बीजेपी की ताकत भी बढ़ेगी। यही वजह है कि बीजेपी इस मौके को भुनाने की कोशिश में है।

एनडीए का नंबर गेम और सहयोगी दल
बीजेपी के पास 89 विधायक हैं, जबकि जेडीयू के पास 85 सीटें हैं। इसके अलावा चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे सहयोगी दलों के कुल 28 विधायक भी एनडीए के साथ हैं। इस तरह बीजेपी के पास करीब 117 का आंकड़ा बनता है, जो बहुमत से थोड़ा ही पीछे है।

क्या बदलेगा सत्ता का संतुलन?
अगर बीजेपी कांग्रेस के विधायकों को अपने साथ जोड़ लेती है, तो वह जेडीयू पर निर्भरता कम कर सकती है। हालांकि केंद्र की राजनीति में जेडीयू का समर्थन अभी भी अहम बना रहेगा। फिलहाल बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं और आने वाले दिनों में सीएम पद को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

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