बिहार की राजनीति इन दिनों नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है। चर्चा है कि 10 अप्रैल के बाद वह कभी भी इस्तीफा दे सकते हैं और इसके बाद नई सरकार का गठन हो सकता है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
भाजपा बन सकती है बड़ी दावेदार
राजनीतिक समीकरणों को देखें तो इस बार भाजपा मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण मुख्यमंत्री पद भाजपा के खाते में जा सकता है। वहीं जदयू की भूमिका भी अहम बनी हुई है और पार्टी सरकार के गठन में अपनी हिस्सेदारी को लेकर सक्रिय है। जानकारों का मानना है कि इस बार सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है, जहां भाजपा बड़े भाई की भूमिका में नजर आएगी।
डिप्टी सीएम और मंत्रिमंडल का गणित
नई सरकार के संभावित ढांचे को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। खबर है कि मंत्रियों की संख्या 30 से ज्यादा हो सकती है, जिसमें भाजपा और जदयू दोनों को बराबर से हिस्सेदारी मिल सकती है। डिप्टी सीएम पद को लेकर भी कई नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें निशांत कुमार और विजय चौधरी का नाम चर्चा में है। इसके अलावा छोटे सहयोगी दलों को भी सीमित लेकिन अहम प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
सीएम रेस में कई बड़े नाम शामिल
मुख्यमंत्री पद के लिए कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय और प्रेम कुमार जैसे चेहरे प्रमुख हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा किसी नए चेहरे पर दांव खेलकर सबको चौंका सकती है। जातीय समीकरणों को देखते हुए भी फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य की राजनीति पर बड़ा असर पड़ेगा।
आखिरी फैसला दिल्ली से तय होगा
फिलहाल पूरा मामला भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर टिका हुआ है। माना जा रहा है कि अंतिम निर्णय दिल्ली में ही लिया जाएगा, जहां गठबंधन की रणनीति और आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर फैसला होगा। बिहार की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व का नहीं बल्कि नई रणनीति का संकेत भी हो सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आखिर बिहार की गद्दी किसे सौंपी जाती है और यह सियासी कहानी आगे क्या मोड़ लेती है।
