भवानीपुर में ईद से सियासी संग्राम तेज, ममता और सुवेंदु आमने-सामने, आरोपों की गर्मी में बढ़ा चुनावी माहौल
पश्चिम बंगाल की भवानीपुर सीट इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। ईद के मौके पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने अपने-अपने तरीके से चुनावी अभियान की शुरुआत की। ममता बनर्जी कोलकाता के रेड रोड पर ईद की नमाज में शामिल हुईं और लोगों को बधाई दी। वहीं सुवेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना की। दोनों नेताओं के इस कदम को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे साफ है कि चुनाव अब पूरी तरह धार्मिक और भावनात्मक रंग लेता नजर आ रहा है।
भवानीपुर सीट पर सीधा मुकाबला
भवानीपुर विधानसभा सीट इस बार बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बन गई है। इसकी वजह है ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधा मुकाबला। दोनों नेता लगातार दूसरी बार आमने-सामने हैं। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम सीट पर दोनों के बीच मुकाबला हुआ था, जिसमें सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। हालांकि बाद में ममता ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर वापसी की थी। अब एक बार फिर यही सीट दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है और पूरे राज्य की नजर इसी मुकाबले पर टिकी हुई है।
ममता बनर्जी का तीखा बयान
ईद की नमाज में शामिल होने के बाद ममता बनर्जी ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वह राज्य के सभी धर्मों और समुदायों के साथ खड़ी हैं और किसी को भी अधिकार छीनने नहीं देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह डरने वाली नहीं हैं। ममता ने यह भी कहा कि कुछ लोग पैसे लेकर वोट बांटने की राजनीति कर रहे हैं। उनके बयान से साफ है कि वह चुनाव में खुद को एक मजबूत और सबको साथ लेकर चलने वाली नेता के रूप में पेश करना चाहती हैं।
सुवेंदु का पलटवार और बढ़ा विवाद
दूसरी ओर सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के ईद कार्यक्रम में शामिल होने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य को ऐसे मुख्यमंत्री की जरूरत है जो सभी समुदायों के लिए समान हो, न कि किसी एक वर्ग की राजनीति करे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धर्म के आधार पर राजनीति की जा रही है और इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है। वहीं कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने सुवेंदु पर पलटवार करते हुए कहा कि वह सिर्फ सत्ता के लिए नफरत की राजनीति कर रहे हैं। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और चुनावी माहौल और ज्यादा गरमाता जा रहा है।
