न्यूज प्लस डेस्क, लखनऊ। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बहाने उत्तर प्रदेश में अब बहस छिड़ गई है कौन बड़ा सनातनी है, हिन्दू-मुस्लिम के बाद वोटों के लिए अब सनातन-सनातन हो रहा है। सपा ने विधान परिषद में शंकराचार्य से अभद्रता का मुद्दा उठाया तो भाजपा ने कहा सपा सरकार में तो उन पर लाठियां चली थीं।
माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को शाही स्नान से रोकने, उनसे शंकराचार्य की उपाधि के प्रयोग पर सवाल करना और उनके समर्थकों से मारपीट के मुद्दे को सपा ने उठाया तो भाजपा ने पलटवार किया। भाजपा बोली इन्हीं शंकराचार्य पर सपा सरकार ने लाठियां चलवायी थीं, राम भक्तों पर गोलियां चलवायी थीं अब सपा को सनातन और शंकराचार्य याद आ रहे हैं। इस मुद्दे पर सपा और भाजपा में खासा टकराव हुआ, साफ है दोनों को हिन्दू वोटों की चिंता बढ़ गई है।
अभी तक भाजपा, सपा पर मुस्लिम वोटों के लिए तुष्टीकरण का आरोप मढ़ती थी पर जब सपा ने शंकराचार्य का मुद्दा पकड़ा तो भाजपा को हिन्दू वोट बचाने के लिए सनातन के आसपास ही रहना पड़ रहा है और सपा इसका पूरा फायदा उठाना चाहती है। सपा की विधानसभा चुनाव तक यह मुद्दा गरम रखने की रणनीति है और वह इसमें काफी हद तक सफल होती भी दिख रही है।



