न्यूजप्लस, राजेश द्विवेदी।
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव अब आजम खां के सहारे 2027 के रोडमैप पर आगे बढ़ने लगे हैं। यूं तो मुस्लिम कोर वोटबैंक सपा का ही माना जाता रहा है लेकिन अखिलेश की कोशिश है कि औवेसी की तर्ज पर यूपी में चुनावी समर के दौरान कोई सब्जबाग दिखाकर सेंधमारी न कर सके। फिलहाल यूपी में मुस्लिम वोटबैंक सपा पर ही एतबार करता रहा है पर औवैसी की कतरब्योंत, वाकपटुता और इमोशल कार्ड खेलने की कूटनीति कोई भी खेल करने में सक्षम है। शायद इसलिए अखिलेश अब आजम खां को पार्टी का मजबूत अलम्बरदार होने का संदेश दे रहे हैं।
अखिलेश यादव आजम से मिलने रामपुर भी गए थे पर लखनऊ में अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ अखिलेश से गर्मजोशी से मिलना और मौजूदा हालातों के साथ भावी योजनाओं पर गुफ्तगू करना तमाम तैयारियों का संकेत दे रहा है। अखिलेश नई पीढ़ी पर भी कसीदे पढ़ रहे हैं। कहते हैं कि नई पीढ़ी प्रगतिशील हो जाती रही है, उनका इशारा हिन्दू-मुस्लिम से इतर रहा है। दिल में सबके लिए सम्मान, प्रेम और मोहब्बत है। आजम को विशेष तरजीह देने के दो मायने हैं, एक मुस्लिमों को यह एतबार हो जाए कि भाजपा सरकार के दौरान जिस तरह अल्पसंख्यकों को कुचला गया , उससे मुकाबला लेने में वही सक्षम है, दूसरा, आजम मुस्लिम बिरादरी के बड़े नेता है , ऐसे में सपा उनके साथ है और आगे भी उनकी भलाई के लिए आजम के साथ बैठकर योजनाएं बनाएंगे। 35 मिनट तक अखिलेश और आजम की मंत्रणा में सारे ब्लूप्रिंट दोनों तरफ से रखे गए और उन पर राय-मशविरा हुआ। आजम से मुलाकात पर अखिलेश कहते हैं कि वे (आजम) जब हमारे घर आए तो न जाने कितनी यादें संग ले आए, ये जो मेलमिलाप है , यही हमारी साझा विरासत है। बहरहाल , अखिलेश की आजम के साथे पॉलिटिकल कदमताल कितनी असरदार होगी , यह तो आने वाले साल में पता लग जाएगा लेकिन अखिलेश इस बार ज्यादा मैच्योर , संयमित, विजनभरी रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं। राजनेता के तौर पर अखिलेश ने यूपी में अपने लिए ‘कद्दावर कैनवास’ को जरुर गढ़ लिया है।



