हिंदी सिनेमा के दिग्गज हास्य अभिनेता गोवर्धन असरानी, जिन्हें दुनिया भर में असरानी के नाम से जाना जाता है, का सोमवार शाम को मुंबई में निधन हो गया। 84 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे असरानी का निधन फेफड़ों में पानी भरने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुआ। उनका अंतिम संस्कार सोमवार शाम को ही मुंबई के सांताक्रूज श्मशान घाट पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस खबर ने बॉलीवुड से लेकर आम दर्शकों तक शोक की लहर दौड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई दिग्गजों ने उनकी आत्मा की शांति की कामना की है।
असरानी के निजी सचिव बाबूभाई ने बीबीसी हिंदी को दिए इंटरव्यू में पुष्टि की कि वे पिछले चार दिनों से जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती थे। उनकी हालत गंभीर थी, लेकिन डॉक्टरों की पूरी कोशिशों के बावजूद वे बच न सके। असरानी के भतीजे अशोक असरानी ने इंडिया टुडे को बताया, "चाचा जी का निधन एक अपूरणीय क्षति है। वे न सिर्फ हमारे परिवार के मुखिया थे, बल्कि पूरे सिनेमा जगत के मार्गदर्शक भी।
जयपुर से बॉलीवुड तक का सफर
गोवर्धन रामशंकर पंडित, जिन्हें बाद में असरानी के नाम से मशहूर हुए, का जन्म 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में एक सर्राफा व्यापारी के परिवार में हुआ था। बचपन से ही थिएटर और नाटकों में रुचि रखने वाले असरानी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद गुजरात के एक कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाने का काम किया। लेकिन उनका असली जुनून अभिनय था। 1960 के दशक में वे मुंबई आ गए और फिल्मों में एंट्री की तलाश करने लगे।
उनकी शुरुआत 1967 में आई फिल्म 'हकीकत' से हुई, लेकिन असली पहचान उन्हें 1971 में रमेश सिप्पी की ब्लॉकबस्टर 'अंदाज' से मिली। लेकिन 'शोले' (1975) ने उन्हें अमर बना दिया। फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए जेलर अंग्रेजों के जमाने के कैदी 'कमांडेंट जेलर' के किरदार ने दर्शकों को हंसी के ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। "ये हाथ हमें दे दे ठाकुर" जैसी डायलॉग्स आज भी याद किए जाते हैं। असरानी ने खुद कई इंटरव्यूज में कहा था कि यह किरदार उनके करियर का टर्निंग पॉइंट था।
असरानी का जन्म जयपुर में हुआ होने के कारण वे राजस्थानी संस्कृति से गहराई से जुड़े थे। उन्होंने बताया था कि उनके पिता ने उन्हें 'असरानी' सरनेम दिया था, जो गुजराती मूल का था। सिनेमा में आने से पहले वे स्टेज पर 'जेलर' नाटक कर चुके थे, जो बाद में 'शोले' का आधार बना।
चमकादार करियर
असरानी का करियर पांच दशकों से ज्यादा लंबा रहा। उन्होंने 350 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें से अधिकांश में वे सहायक भूमिकाओं में थे, लेकिन हर किरदार को यादगार बना दिया। 1970-80 के दशक में वे हास्य के बादशाह थे। फिल्में जैसे 'नमक हलाल', 'कुली', 'सत्ते पे सत्ता', 'हीरों का स्वर्ग' और 'आनंद' में उनके किरदार आज भी क्लासिक माने जाते हैं।
'नमक हलाल' (1982) में मिथुन चक्रवर्ती के साथ उनका कॉमिक टाइमिंग का जलवा देखने लायक था। वहीं, 'शोले' के अलावा 'मजबूर' और 'रॉकी' जैसी फिल्मों में उन्होंने भावुक भूमिकाएं भी निभाईं, जो साबित करती हैं कि वे बहुमुखी अभिनेता थे। बाद के वर्षों में वे 'लापता' (1993) और 'गजनी' (2008) जैसी फिल्मों में दिखे।
उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिनमें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट परफॉर्मेंस इन ए कॉमिक रोल ('शोले' के लिए) और पद्मश्री (2016) शामिल हैं। असरानी ने थिएटर, टेलीविजन और रेडियो में भी योगदान दिया। वे 'तुम्हारी अमृता' जैसे नाटकों के प्रशंसक थे और खुद स्टेज पर सक्रिय रहे।
उनकी शादी 1977 में अभिनेत्री करुणा कदवाडी से हुई, जिनके साथ उन्होंने कई फिल्मों में काम किया। दंपति के दो बेटे हैं - विनीत और विकास। असरानी अक्सर कहते थे, "हंसी देना मेरा धर्म है। जीवन छोटा है, इसे हंसते-खेलते जियो।"
हाल की जिंदगी
पिछले कुछ वर्षों में असरानी की सेहत नासाज रहने लगी थी। 2020 में कोविड के दौरान वे अस्पताल में भर्ती हुए थे। फिर हृदय संबंधी समस्याओं और फेफड़ों की बीमारी ने उन्हें परेशान किया। लेकिन वे कभी हार न मानने वाले इंसान थे। जुलाई 2025 में एक फर्जी मौत की अफवाह फैली थी, जिसे उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर खारिज किया था। उन्होंने कहा था, "मैं अभी भी हंस रहा हूं, और हंसाऊंगा।"
असरानी सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थे, लेकिन उनके फैन्स क्लब्स ने उनकी पुरानी क्लिप्स शेयर करके उन्हें ट्रेंडिंग बनाए रखा। वे राजस्थान की राजनीति में भी रुचि रखते थे और जयपुर लौटकर सामाजिक कार्य करना चाहते थे।
सेलेब्स और फैन्स का शोक
असरानी के निधन पर बॉलीवुड के सितारों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। अमिताभ बच्चन, जो 'शोले' के सह-कलाकार थे, ने ट्वीट किया, "असरानी जी के बिना 'शोले' अधूरा था। उनकी हंसी अब चांद-तारों में गूंजेगी।" अनुपम खेर ने लिखा, "हास्य के राजा चले गए। उनके किरदार हमें हमेशा प्रेरित करेंगे।"
राजस्थान के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने X पर पोस्ट किया, "जयपुर के बेटे असरानी जी का निधन दुखद। उनके योगदान को याद रखेंगे। ॐ शांति।" छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी संवेदना व्यक्त की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "असरानी ने कई पीढ़ियों का मनोरंजन किया। उनके निधन से सिनेमा जगत ने एक रत्न खो दिया।" महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी शोक व्यक्त किया। X पर #RIPAsrani ट्रेंड कर रहा है, जहां फैन्स पुरानी यादें शेयर कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "जेलर साहब, अब स्वर्ग में हंसी का राज करें।"



