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UP के 2.91 करोड़ वोटर लापता, किसे नुकसान-किसका फायदा !

UP के 2.91 करोड़ वोटर लापता, किसे नुकसान-किसका फायदा !

न्यूज प्लस डेस्क, लखनऊ। उप्र के कुल 15.44 करोड़ वोटर में 2.91 करोड़ वोटर लापता हैं, यानी इतने मतदाताओं के गणना फार्म वापस नहीं जमा हुए हैं। आज यानी 11 दिसंबर 2025 गणना फार्म जमा करने की आखिरी तारीख है, यानी इतने वोट कटने का खतरा पैदा हो गया है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने लापता वोटरों की एक बार और जांच कराने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है, निर्वाचन आयोग से समय बढ़ने की उम्मीद जतायी जडा रही है।

बड़ा सवाल यह है कि भाजपा और सपा के BLA भी निर्वाचन आयोग के BLO के साथ SIR में जुटे हैं, इसके बाद भी इतनी बड़ी संख्या में वोटर कहां गायब हो गए। इनमें सबसे अधिक 2.40 लाख प्रयागराज, 2.20 लाख लखनऊ, 1.60 लाख सहारनपुर और 1.40 लाख वोटर गाजियाबाद में गायब हैं। आयोग की मानें तो इनमें से 1.27 करो मतदाता अपने पुराने या मूल पतों से दूसरी जगह सिफ्ट हो चुके हैं, ऐसा है तो क्या अभी तक इनके दो स्थानों पर नाम थे। मुख्य निर्चान अधिकारी का कहना है यह जांच से पता चलेगा जिसमें पार्टियों के BLA को भी शामिल किया जाएगा।

निर्वाचन आयोग से दो या एक सप्ताह का समय मिल भी गया तो लापता 2.91 करोड़ मतदाताओं को खोजना आसान काम नहीं होगा। यह तय माना जा रहा है कि उप्र में ढाई करोड़ मतदाताओं के नाम कटने ही हैं, इनमें 1.27 करोड़ वह मतदाता शामिल हैं जो अपने पतों से कहीं और शिफ्ट हो चुके हैं। इनमें से अधिकतर वह हैं जिनके नाम अपने गांवों में थे और शहर या कस्बे में नौकरी करने आ गए तो वहां भी नाम जुड़वा लिया। अब अपने मूल पतों या गांव के पते पर ही वोटर रहना चाहते हैं इसलिए शहर गणनी फार्म जमा नहीं किए।

SIR के साथ इससे फायदा-नुकसान का आकलन पार्टियां करने लगी हैं। भाजपा का मानती है कि शहरी वोट कटने से उसका नुकसान होगा, जबकि सपा को ग्रामीण वोटर कटने से नुकसान है। ऐसे में अगर दोहरे वोटर अपना शहर का वोट कटवा रहे हैं तो भाजपा का नुकसान माना जा रहा है, जबकि सपा कह रही है उसके वोटर काटे जा रहे हैं। इस शंका-आशंका के बीच दोनों दलों ने अपने BLA अब ज्यादा सक्रिय कर दिए हैं ताकि एक भी गलत नाम न कट पाए, अब सभी को इंतजार SIR का समय बढ़ाने को लेकर है।

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