60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की तैयारी, 12 राज्यों में सेना संभालेगी ट्रेनिंग की जिम्मेदारी
नई दिल्ली | केंद्र सरकार देश में नागरिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल करने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय भारतीय सेना के सहयोग से 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में करीब 60 हजार नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों, आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों और संभावित खतरों से निपटने के लिए नागरिक सुरक्षा तंत्र को अधिक सक्षम बनाना है।
गृह मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस पहल के पहले चरण में 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से 50 प्रशिक्षकों का चयन प्रस्तावित है। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों पर आयोजित किया जाएगा। इसे नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू होगी पहल
इस पायलट परियोजना में उत्तर प्रदेश सहित जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु को शामिल किया गया है।
सरकार की योजना है कि शुरुआती चरण में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने राज्यों में आगे स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दें। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर को 100 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करना होगा। इस व्यवस्था के जरिए लगभग 60 हजार स्वयंसेवकों तक प्रशिक्षण पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आधुनिक सुरक्षा खतरों से निपटने पर रहेगा जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन से जुड़े खतरे तथा हवाई हमलों के दौरान सतर्कता जैसे विषय शामिल होंगे।
दूसरे हिस्से में आपातकालीन प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु खतरों के प्रति जागरूकता, घायलों की सहायता तथा खोज एवं बचाव अभियान जैसे विषय शामिल हैं।
तीसरे हिस्से में संचार और आपसी समन्वय को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके तहत आपातकालीन संचार व्यवस्था, साइबर सुरक्षा संबंधी सावधानियां, डिजिटल क्षमता, नागरिक प्रशासन और सेना के बीच तालमेल तथा घटना के दौरान कमान और प्रबंधन की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश को भी मिलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ
उत्तर प्रदेश उन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल है, जहां इस पहल को पहले चरण में लागू करने की योजना है। राज्य में प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों तक प्रशिक्षण पहुंचाने का लक्ष्य है।
इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी बड़ी आपदा, आग लगने, संचार व्यवस्था बाधित होने या अन्य आपात स्थिति में शुरुआती प्रतिक्रिया बेहद अहम होती है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक संबंधित एजेंसियों के पहुंचने से पहले प्रभावित लोगों की सहायता करने, सुरक्षित निकासी में सहयोग देने और राहत कार्यों के समन्वय में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, कार्यक्रम के वास्तविक प्रभाव का आकलन प्रशिक्षण पूरा होने और इसके बाद स्वयंसेवकों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण के परिणामों के आधार पर किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री के नागरिक सुरक्षा नेटवर्क के विजन से जुड़ी पहल
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस संबोधन में आधुनिक तकनीक और बेहतर तैयारी से युक्त नागरिक सुरक्षा नेटवर्क विकसित करने की परिकल्पना से जुड़ा है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के जरिए भारतीय सेना के परिचालन अनुभव और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों के नेटवर्क को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है। शुरुआती परियोजना के परिणामों का आकलन करने के बाद इसे अन्य राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक चरणबद्ध तरीके से विस्तारित करने की परिकल्पना भी है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार की यह पहल नागरिक सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। पहले चरण में 600 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देने और उनके माध्यम से करीब 60 हजार स्वयंसेवकों तक प्रशिक्षण पहुंचाने का लक्ष्य है। अब इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशिक्षण कितनी प्रभावी तरीके से लागू होता है और प्रशिक्षित स्वयंसेवक वास्तविक आपात स्थितियों में किस तरह योगदान देते हैं।
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