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107 दिन की जंग के बाद शांति की राह, ईरान-अमेरिका डील से दुनिया को राहत, पीएम मोदी ने किया स्वागत

107 दिन की जंग के बाद शांति की राह, ईरान-अमेरिका डील से दुनिया को राहत, पीएम मोदी ने किया स्वागत

ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद आखिरकार शांति समझौते पर सहमति बन गई है। इस बड़ी डील का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संघर्ष के कारण दुनिया भर में आर्थिक अस्थिरता बढ़ी थी और वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ था। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकलना पूरी दुनिया के हित में है।

14 मुद्दों पर बनी सहमति

अमेरिका और ईरान के बीच कुल 14 महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर 19 जून को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस मौके पर मौजूद रह सकते हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर समझौते की जानकारी देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नाकेबंदी तुरंत हटाई जाएगी। इसके साथ ही इस अहम समुद्री मार्ग को पूरी तरह खोलने का फैसला भी लिया गया है।

107 दिन के तनाव का अंत

करीब 107 दिनों तक चले तनाव और संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी थी। इस दौरान तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखने को मिली और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि अगर हालात नहीं सुधरे तो दुनिया को बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

व्यापार और शिपिंग को मिलेगा फायदा

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। संघर्ष के दौरान यहां बड़ी संख्या में जहाज फंस गए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी भी करीब 600 बड़े जहाज इस क्षेत्र में रुके हुए हैं, जिनमें भारत के लगभग 13 जहाज भी शामिल हैं। शांति समझौते और जलमार्ग खुलने के बाद इन जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सकेगी। इससे वैश्विक व्यापार, तेल-गैस सप्लाई और शिपिंग सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारत जैसे आयातक देशों के लिए भी यह समझौता फायदेमंद साबित हो सकता है।

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