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तो क्या अनिल मिश्रा हैं असली चढ़ावा चोर, लीक हुआ SIT को दिया चंपत राय का बयान, छिड़ी बहस

तो क्या अनिल मिश्रा हैं असली चढ़ावा चोर, लीक हुआ SIT को दिया चंपत राय का बयान, छिड़ी बहस

अयोध्या, न्यूज प्लस। श्रीराम मंदिर न्यास के कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरि के बाद अब महासचिव रहे चंपत राय बंसल का वह बयान सामने आया है जो उन्होंने SIT को दिया है। इस बयान में उन्होंने चढ़ावा गिनती की व्यवस्था बदलने के लिए पूरी तरह अनिल मिश्रा को दोषी ठहराया है। उन्होंने यहां तक कहा है कि नई व्यवस्था के बारे में उनको बताया तक नहीं गया और अनिल मिश्रा ने स्टेट बैंक के साथ MOU कर लिया। इससे पहले गोविन्ददेव गिरि सारी जिम्मेदारियों से पूरी तरह से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं।

दरअसल SIT अनिल मिश्रा और चंपत राय दोनों से पहले पूछताछ कर चुकी है, इसके बाद चंपत राय ने 6 जुलाई 2026 को एक लिखित बयान SIT को सौंपा जिसमें उन्होंने कहा है कि कुछ महत्वपूर्ण तथ्य पहले बयानों में छूट गए जिनको अब शामिल कर लिया जाए। चंपत राय का यह लिखित बयान लीक हो गया जिसके बाद तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। कोई मान रहा है कि कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरि की तरह चंपत राय भी दूसरों पर ठीकरा फोड़कर बचना चाह रहे हैं तो चंपत राय के समर्थक कह रहे हैं बयानों में जो कहा गया है वह लिखित रूप में मौजूद है और उसमें कोई गलत नहीं है।

इस लिखित बयान में चंपत राय ने 6 फरवरी 2025 को अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक के बीच हुए उस MOU का जिक्र किया है जिसमें गणना प्रक्रिया के लिए संयुक्त रूप से दिशा निर्देश निर्धारित किए गए हैं। चंपत राय के अनुसार इस नए MOU में पूरानी सभी व्यवस्थाएं बदल दी गईं। उन्होंने कहा है कि अगस्त 2020 से लेकर जून 2026 तक जो भी MOU हुए हैं उसमें उनके यानी चंपत राय और संबंधित दूसरे पक्षों के हस्ताक्षर हुए हैं। 9 फरवरी 2024 को एक MOU हुआ जिसके हर पन्ने पर उनके हस्ताक्षर हैं लेकिन गणना यवस्था संबंधी नए MOU के बारे में उनको जानकारी ही नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया है कि इस MOU की जानकारी उनको क्यों नहीं दी गई और उनसे हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए। 

चंपत राय के अनुसार चढ़ावे की गणना की व्यवस्था बैठकर करने की व्यवस्था थी। गणना कर्मियों अंदर आते-जाते समय विशेष तलाशी की व्यवस्था थी, साथ ही बिना जेबों वाले कपड़े पहनकर आने की व्यवस्था थी जिसे बदल दिया गया और गणना कुर्सी-मेजो पर बैठकर होने लगी। मनचाहे कपड़े पहने जाने लगे और तलाशी व निगरानी बंद हो गई। उन्होंने आगे कहा है कि यह दिशा निर्देश जल्दबाजी में जारी किए गए शायद उनसे कुछ छिपाने की मंशा हो। यह भी कहा है कि स्टेट बैंक के उच्च अधिकारियों को भी शायद असलियत की जानकारी नहीं थी नहीं तो वह व्यवस्ता में सुधार जरूर करते। यही नहीं चंपत राय ने यहां तक बताया है कि गणना के लिए जिन युवकों का चयन किया गया दरअसल वह हाउसकीपिंग स्टाफ यानी वह सारे सफाई कर्मचारी थे।

इस नए खुलासे के बाद एक नई बहस छिड़ गई है, क्या वास्तव में चंपत राय को कुछ नहीं पता था। नया MOU 6 फरवरी 2025 को अनिल मिश्रा और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक गोविन्द मिश्र के बीच हुए MOU के बाद लागू नई व्यवस्थाएं क्या चंपत राय ने कभी नहीं देखीं और देखीं तो सवाल क्यों नहीं उठाए। जिस तरह कोषाध्यक्ष गोविन्ददेव गिरि ने सफाई दी कि उनके किसी व्यवस्था और लेनदेन में हस्ताक्षर नहीं हैं और वह कभी गणना रूम में नहीं जाते थे उसी तरह क्या चंपत राय भी यह सब कह कर बच जाएंगे। तकनीकीतौर पर देखा जाए तो SIT हो या पुलिस उसके लिए वही साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे जो लिखित तौर पर मौजूद होंगे और इस हिसाब से तो चंपत राय एकदम पाकसाफ हैं। अब इंतजार 15 जुलाई को आने वाली SIT की फाइनल रिपोर्ट है, जिसको लेकर सीएम योगी से लेकर संघ और विहिप सभी बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। ये सारे लोग दुहाई दे रहे हैं कि जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। 

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