ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर नई तारीखों की घोषणा कर दी गई है। तेहरान प्रशासन के अनुसार राजकीय अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी, जबकि 9 जुलाई को उन्हें मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। पहले यह कार्यक्रम इससे पहले आयोजित किया जाना था, लेकिन मुहर्रम के धार्मिक आयोजनों को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। नई तारीखों के ऐलान के बाद पूरे ईरान में तैयारियां तेज हो गई हैं और प्रशासन बड़े स्तर पर व्यवस्थाओं में जुट गया है।
मुहर्रम के कारण बदला फैसला
तेहरान के मेयर अलीरेज़ा ज़कानी ने बताया कि मुहर्रम के पहले दस दिन शिया समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान इमाम हुसैन की शहादत की याद में पूरे देश में शोक सभाएं और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रशासन नहीं चाहता था कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन और पूर्व सर्वोच्च नेता का अंतिम संस्कार एक साथ हो। इसलिए निर्णय लिया गया कि पहले मुहर्रम के कार्यक्रम पूरे हों और उसके बाद राजकीय अंतिम संस्कार किया जाए। इस फैसले को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेहरान से मशहद तक होगा अंतिम सफर
योजना के अनुसार 4 जुलाई से तेहरान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू होंगे। इसके बाद विभिन्न चरणों में अंतिम यात्रा आगे बढ़ेगी और 9 जुलाई को मशहद में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मशहद ईरान का एक प्रमुख धार्मिक शहर माना जाता है और यहां लाखों श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं। प्रशासन का कहना है कि अंतिम यात्रा के दौरान देशभर से लोग शामिल होंगे और कई विदेशी प्रतिनिधिमंडल भी कार्यक्रम में पहुंच सकते हैं।
2 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद
ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम संस्कार कार्यक्रम में लगभग 2 करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी सार्वजनिक श्रद्धांजलि सभाओं में से एक होगी। इसी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस, यातायात विभाग और स्थानीय प्रशासन को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन को लेकर अलग-अलग योजनाएं तैयार की जा रही हैं ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
दुनिया की नजरें ईरान पर
अली खामेनेई ने करीब 37 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया था और देश की राजनीति, विदेश नीति तथा क्षेत्रीय मामलों में उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती रही है। इसलिए उनका अंतिम संस्कार केवल एक राजकीय कार्यक्रम नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जा रहा है। तेहरान से मशहद तक होने वाले इन कार्यक्रमों पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में ईरान में होने वाली तैयारियां और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी रह सकती है।
