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क्‍यों मनाई जाती है बकरीद

[Edited By: Aviral Gupta]

Saturday, 1st August , 2020 01:38 pm

बकरीद को इस्लाम में बहुत ही पवित्र त्योहार माना जाता है. इस्लाम में एक साल में दो तरह ईद की मनाई जाती है. एक ईद जिसे मीठी ईद कहा जाता है और दूसरी बकरीद... एक ईद समाज में प्रेम की मिठास घोलने का संदेश देती है... तो वहीं दूसरी ईद अपने कर्तव्य के लिए जागरूक रहने का सबक सिखाती है... ईद-उल-ज़ुहा या बकरीद का दिन फर्ज़-ए-कुर्बान का दिन होता हैं....बकरीद पर सक्षम मुसलमान अल्लाह की राह में बकरे या किसी अन्य पशुओं की कुर्बानी देते हैं... इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है. रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग 70 दिनों बाद इसे मनाया जाता है....ईद उल अज़हा को सुन्नते इब्राहीम भी कहते है.... इस्लाम के मुताबिकअल्लाह ने हजरत इब्राहिम की परीक्षा लेने के उद्देश्य से अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया....हजरत इब्राहिम को लगा कि उन्हें सबसे प्रिय तो उनका बेटा है इसलिए उन्होंने अपने बेटे की ही बलि देना स्वीकार किया....हजरत इब्राहिम ने जैसे ही अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने एक बकरे की कुर्बानी दिलवा दी. कहते हैं तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा...बकरीद का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने जुल हिज्ज में मनाया जाता है... पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में मक्का सऊदी अरब में एकत्रित होकर हज मनाते है...ईद उल अजहा भी इसी दिन मनाई जाती है. वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है. दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जाता है...
बकरीद के दिन मुस्लिम बकराभेड़ऊंट जैसे किसी जानवर की कुर्बानी देते हैं. इसमें उस पशु की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है जिसके शरीर का कोई हिस्सा टूटा हुआ होभैंगापन हो या जानवर बीमार हो बकरीद के दिन कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा जाता है. एक खुद के लिएदूसरा सगे-संबंधियों के लिए और तीसरे हिस्से को गरीब लोगों में बांटे जाता है...

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