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शराब ख़रीदने का गुनहगार कौन?

[Edited By: News Plus]

Tuesday, 5th May , 2020 09:17 pm

एक मेसेज तेजी से फैलाया जा रहा है कि" जो गरीब शराब की लाइन में लगा है उसको दिये जाने वाली राशन की सहायता बंद कर दी जाये उससे सरकार को मुनाफा होगा ।"
इस विचार से मैं पूरी तरह असहमत हूँ : पहली बात सरकार मुनाफ़ा कमाने के लिये कार्य कर रही है यही अफ़सोस जनक है! प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि जान है तो जहान है क्या ये बात सरकार भूल गयी?
दूसरी बात लिखी है उसका राशन बंद कर दिया जाये जो कि मेरी समझ में एकदम ग़लत है परिवार का एक सदस्य जो नशा करने जाता है जो ग़लत है उसके गलत काम की सजा पूरा परिवार भुगते जो कि मझे न्याय संगत नहीँ लगता ।
तीसरी बात क्या हम जानते हैं
नशा और अपराध का संबंध?
अपराध ब्यूरो रिकार्ड के अनुसार, बडे़-छोटे अपराधों, बलात्कार, हत्या, लूट, डकैती, राहजनी आदि तमाम तरह की वारदातों में नशे के सेवन का मामला लगभग 73.5% तक है और बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में तो ये दर 87% तक पहुंची हुई है। 
आज के समय में जबकि लोगों की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है नशा चालू करने से अपराधों और घरेलू अपराध बढेंगे ।
फिजिकल डिस्टेंसिग की तस्वीरें हम देख रहे हैं जिससे संक्रमण की स्थिति क्या हो सकती है ? जबकि आज 46000 से ज्यादा संक्रमितों की संख्या पहुंच गयी है 1500 से ज्यादा मौतैं हो चुकी हैं ।
हमारे पुलिस कर्मी जो जनता की सेवा में लगे हैं उन पर एक अनावश्यक कार्य का बोझ बढा दिया गया।
सरकार की अगर सिर्फ राजस्व ही
मजबूरी है तो जिन राज्यों( गुजरात और बिहार) में पिछले कई वर्षों से शराब बंदी है उनकी अर्थ व्यवस्था से सरकार क्यों नहीं सीखती ।
इसलिए गलती सिर्फ सरकार की है ।

परेश चतुर्वेदी

नोट :यह लेखक के अपने विचार हैं

 

 

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